चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनएचएम कर्मचारियों से डीसी रेट पर वेतन लेने के साथ ही उसके मानकों के पालन के लिए कहा गया, जिससे उनके काम के घंटों में बढ़ोतरी के साथ ही अवकाश में कटौती होगी। इसी के विरोध में कर्मचारी हड़ताल कर रहे हैं।
चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए शुक्रवार को 178 एनएचएम कर्मचारियों की सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया। यह सभी कर्मचारी हड़ताल पर थे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मरीजों की देखभाल को लेकर अब इन कर्मचारियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
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स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने इन कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के साथ ही उनके नामों की सूची पुलिस को सौंप दी है और कहा है कि सूची में शामिल लोगों को जीएमएसएच-16 समेत शहर के किसी भी स्वास्थ्य केन्द्र में प्रवेश नहीं करने देना है। इसके लिए पुलिस से उचित सुरक्षा बहाल करने को कहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से एनएचएम कर्मचारियों में काफी रोष है।
स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग का कहना है कि इस संकट की घड़ी में जब कोरोना के साथ डेंगू और मलेरिया का प्रकोप फैला है, एनएचएम कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाकर व्यवस्था ध्वस्त करने की कोशिश की है। इसलिए उन पर कार्रवाई की गई है। वहीं दूसरी तरफ एनएचएम कर्मचारियों ने दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहकर विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
स्वास्थ्य सचिव के आदेश पर उन्हें जीएमएसएच-16 में प्रवेश नहीं करने दिया गया। अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने गेट को बंद कर रखा था, जिससे कर्मचारियों ने गेट के बाहर ही दोपहर तीन बजे तक प्रदर्शन किया। अस्पताल के मुख्य द्वार को लगभग आधे घंटे तक बंद रखा गया, जिससे मरीजों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन उनके साथ अन्याय कर रहा है, इसलिए हड़ताल जारी रहेगी।
ये है मामला
एनएचएम कर्मचारियों से डीसी रेट पर वेतन लेने के साथ ही उसके मानकों के पालन के लिए कहा गया, जिससे उनके काम के घंटों में बढ़ोतरी के साथ ही अवकाश में कटौती होगी। इसका कर्मचारियों ने विरोध किया और कहा कि इससे आउटसोर्स को बढ़ावा मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अचानक जारी किए गए आदेश के विरोध में कर्मचारी 28 अक्तूबर से हड़ताल पर चले गए हैं।