चंडीगढ़। नौकरी से निकाले गए 178 एनएचएम कर्मचारियों ने शनिवार को धरना-प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने जीएमएसएच-16 के बाहर सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक धरना दिया। नौकरी से निकाले जाने से इनका गुस्सा बढ़ गया है। धरना दे रहे कर्मचारियों का कहना है कि हड़ताल के नाम पर मामले को घुमाने का प्रयास किया जा रहा है। क्योंकि सूची में उन कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है, जो अवकाश पर हैं। इसके साथ ही जिन कर्मचारियों ने 29 अक्तूबर को हड़ताल छोड़कर ड्यूटी की उन्हें भी काम करने के बाद अगले दिन बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन 12 हजार रुपये पर नौकरी कर रहे लोगों को निकालकर 30 हजार के डीसी रेट का भुगतान कर कर्मचारी रखने को तैयार है। आखिर दोगुने से भी ज्यादा वेतन देकर आउटसोर्स पर कर्मचारी रखने और उन्हें निकालने के पीछे प्रशासन की मंशा क्या है।
वहीं, दूसरी ओर प्रशासन भी अपने निर्णय पर अड़िग है। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने कर्मचारियों को निकालने के मामले पर आपात बैठक की, जिसमें निदेशक स्वास्थ्य और अन्य संबंधित अधिकारियों केसाथ हुई चर्चा में यह निर्णय लिया गया कि उन्हें निकालकर कोई गलती नहीं की गई है। क्योंकि उन्होंने इससे पहले भी 12 दिन की हड़ताल की थी। इसके साथ ही एनएचएम कर्मचारियों को डीसी रेट पर वेतन भुगतान के आदेश पर भी पुन: विचार करने पर सहमति बनी।