चंडीगढ़। पराली की समस्या से निपटने के लिए पंजाब के कृषि और किसान कल्याण विभाग ने 500 करोड़ रुपये की कार्य योजना बनाई है। इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने 150 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है। साथ ही निर्देश दिए हैं कि धान की कटाई के सीजन 2024 के दौरान पराली के उचित प्रबंधन के लिए किसानों को मशीनरी प्रदान करने और अन्य उपायों पर काम करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए। इस मकसद को पूरा करने के लिए जिला स्तर पर जल्द ही फंड जारी किया जाएगा।पराली के प्रबंधन के लिए वर्ष 2024-25 के लिए केंद्र व राज्य सरकार की तरफ से 60-40 प्रतिशत रेशो के हिसाब से फंड जारी किया जाना है। पंजाब सरकार ने दावा किया है कि वह जल्द ही अपने हिस्से का भी फंड जारी कर देगी, ताकि खरीफ की फसल सीजन-2024 के दौरान फसल अवशेष-प्रबंधन मशीनों पर सब्सिडी प्राप्त करने के इच्छुक किसानों, सहकारी सोसाइटियों, एफपीओ और पंचायतों को मशीनें प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
सरकार के अनुसार बासमती भूसे का आम तौर पर पशुओं के चारे के रूप में उपयोग होता है, लेकिन अब धान के भूसे का उपयोग भी चारे के रूप में बढ़ रहा है। यही कारण है कि कृषि विभाग और पशुपालन विभाग मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि धान के भूसे का उपयोग भी पशुओं के चारे में रूप में करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकें। इस संबंध में एक राज्य स्तरीय समिति भी गठित कर दी गई है।
पराली प्रबंधन के लिए किसानों को दी जाएंगी 22 हजार से ज्यादा मशीनें : खुड्डियां
पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि सरकार राज्य में पराली के उचित प्रबंधन के लिए किसानों को सब्सिडी पर 22,000 से अधिक सीआरएम मशीनें उपलब्ध करवाएगी। कृषि मंत्री ने विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और परियोजनाओं की समीक्षा के लिए यहां किसान भवन में एक आयोजित बैठक की अध्यक्षता की और अधिकारियों से कहा कि सब्सिडी वाली पराली प्रबंधन मशीनों के लिए ड्राॅ इसी महीने में निकाला जाए और धान की कटाई शुरू होने से पहले अगस्त 2024 के अंत तक लाभार्थी किसानों को सब्सिडी जारी की जाए, ताकि पराली जलाने के मामलों को पूरी तरह खत्म किया जा सके। धान की सीधी बुआई (डीएसआर) को प्रोत्साहित करते हुए खुडि्डयां ने बताया कि राज्य में पिछले वर्ष के मुकाबले धान की सीधी बुआई के अंतर्गत रकबा 28 प्रतिशत बढ़ गया है।
मक्की की बुआई की स्थिति की भी समीक्षा की :
उन्होंने राज्य में खरीफ की मक्की की बुआई की स्थिति की भी समीक्षा की, जिसके लिए राज्य सरकार मक्की के प्रति 1 किलोग्राम हाईब्रिड बीज की खरीद के पीछे 100 रुपये की सब्सिडी दे रही है। कृषि निदेशक जसवंत सिंह ने कैबिनेट मंत्री को बताया कि खरीफ की मक्की की अब तक 1 लाख एकड़ में बुआई हो चुकी है और उन्होंने मंत्री को आश्वासन दिया कि खरीफ की मक्की के अंतर्गत 2 लाख एकड़ क्षेत्र को लाने का लक्ष्य जल्द ही हासिल कर लिया जाएगा।
सीआरएम मशीनों पर 50 फीसदी सब्सिडी ले सकते हैं किसान :
किसान सीआरएम मशीनरी पर 50 फीसदी सब्सिडी ले सकते हैं, जबकि इस योजना के नियमों के अनुसार सहकारी सोसाइटियों, एफपीओ एवं पंचायतें 80 प्रतिशत सब्सिडी ले सकती हैं। फसल अवशेष के खेतों में निपटारे के लिए सुपर एसएमएस, सुपर सीडर, सरफेस सिडर, स्मार्ट सिडर, हैपी सीडर, पैडी स्ट्रा चौपर, मल्चर और जीरो टिल ड्रिल और खेतों से बाहर निपटारे के लिए बेलर और रैक मशीनों आदि का उपयोग किया जाता है।