चंडीगढ़। भारत सरकार ने पंजाब और हरियाणा में सिकुड़े अनाज के लिए छूट की घोषणा की है। अब सिकुड़े अनाज की निर्धारित सीमा 6 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी गई है। मार्च में भीषण गर्मी की वजह से लगभग पूरे पंजाब के मालवा क्षेत्र में अनाज सिकुड़ गया था। कुछ जिलों में सिकुड़ा हुआ अनाज 40 प्रतिशत तक ऊंचा था।
पंजाब मांग कर रहा था कि इन अनाजों को स्वीकार करने के लिए निर्देशों में ढील दी जाए। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की टीमों ने खरीद शुरू होने के बाद से दो बार राज्य का दौरा किया और शनिवार को केंद्र की ओर से छूट की घोषणा की गई। पंजाब सरकार को भेजे गए पत्र में मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले की जांच की गई है और किसानों की कठिनाई को कम करने और गेहूं की संकट बिक्री से बचने के लिए, राज्य के अनुरोध को स्वीकार करने का निर्णय लिया है। विपणन सीजन 2022-23 के दौरान केंद्रीय पूल खरीद के लिए गेहूं के एक समान निर्देशों में छूट के साथ, यूटी चंडीगढ़ सहित पंजाब और हरियाणा राज्य में गेहूं की खरीद का निर्णय लिया गया है। यूटी चंडीगढ़ सहित पंजाब और हरियाणा के सभी जिलों में सिकुड़े और टूटे हुए गेहूं की सीमा में बिना किसी मूल्य कटौती के समान निर्देशों के तहत 6 प्रतिशत की मौजूदा सीमा के मुकाबले 18 प्रतिशत तक की छूट दी जा सकती है। इस गेहूं को अलग से रखा जाएगा और उसका हिसाब रखा जाएगा। भंडारण के दौरान राहत योजना के तहत खरीदे गए गेहूं के स्टॉक में किसी भी तरह की गिरावट की पूरी जिम्मेदारी पंजाब और हरियाणा राज्य सरकार की होगी, जिसमें यूटी चंडीगढ़ भी शामिल है।
मुख्यमंत्री ने किया फैसले का स्वागत
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने पंजाब के अनुरोध को स्वीकार कर सूखे गेहूं की खरीद में छूट के फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया है कि पंजाब सरकार खाद्य सुरक्षा में योगदान के लिए ईमानदारी से काम करना जारी रखेगा।