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समारोह : गीता जयंती महोत्सव के शुभारंभ पर स्पीकर ने सुनाया गीता का संदेश

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पंचकूला। सेक्टर-1 जैनेंद्र गुरुकुल स्कूल में रविवार को तीन दिवसीय जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव का आगाज हुआ। इस मौके पर हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने स्कूल में स्थित साधना स्थल में हवन और महाआरती में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का दिव्य संदेश हरियाणा की पावन धरा कुरुक्षेत्र में करीब 5100 वर्ष पूर्व अर्जुन को दिया था।
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श्रीकृष्ण ने संदेश दिया था कि मनुष्य को केवल कर्म करना चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गीता हमारे कण-कण में है। सभी को इसके संदेश को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता और स्वतंत्रता संग्राम में अपना जीवन न्योछावर करने वाले वीर जवानों के जीवन और 1966 के बाद से अब तक हरियाणा में हुए विकास पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस मौके पर स्कूली बच्चों और कलाकारों ने गीता और भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि गीता जयंती महोत्सव पंचकूला के साथ-साथ प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि युवा पीढ़ी को संस्कार मिल सके। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से वर्तमान हरियाणा सरकार द्वारा महापुरुषों की जयंती को भी सरकारी स्तर पर मनाया जा रहा है। गुप्ता ने गीता जयंती महोत्सव पर स्कूल में आयोजित प्रदर्शनी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से स्कूली छात्रों ने प्रदर्शनी के माध्यम से गीता का संदेश देने का प्रयास किया है वह सराहनीय है।
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उन्होंने आह्वान किया कि वे हमारी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता को न केवल अपने जीवन में अपनाएं बल्कि दूसरों को भी इसे अपने जीवन में धारण करने के लिए प्रेरित करें। इस मौके पर एसडीएम ऋचा राठी, काली माता मंदिर कालका के सचिव पृथ्वी राज, भाजपा के जिला उपाध्यक्ष उमेश सूद, पार्षद हरेंद्र मलिक, सोनू बिरला, एमपी शर्मा, जिला मीडिया प्रभारी नवीन गर्ग और स्कूलों व कॉलेजों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
महाभारत युद्ध के बाद रुकमणी की शंकाओं को डीसी ने रागिनी से प्रस्तुत की
उपायुक्त महावीर कौशिक ने महोत्सव के दौरान श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में पहल की। उन्होंने महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्री कृष्ण और रुकमिणी के मध्य हुए संवाद को जीवंत कर एक रागिनी प्रस्तुति की। उसको दर्शकों ने खूब सराहा। उपायुक्त ने बताया कि महाभारत का युद्ध 18 दिन चला। युद्ध में कौरवों के पास 11 अक्षोहिणी सेना थी, जबकि पांडवों के पास केवल 7 अक्षोहिणी सेना थी।
इसके बावजूद युद्ध में पांडवों की जीत हुई। महावीर कौशिक ने कहा कि युद्ध के पश्चात रुकमिणी के मन में इसको लेकर शंकाएं थीं, कि कैसे कम सेना होते हुए भी पांडवों ने कौरवों को युद्ध में हरा दिया। इन्हीं शंकाओं को दूर करने के लिए उन्होंने श्री कृष्ण से संवाद किया। इसी संवाद को उन्होंने रागिनी के माध्यम से प्रस्तुत किया।
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