पीजीआई में वरिष्ठता पर मचे घमासान के बीच कैट ने पीजीआई की उस वरिष्ठता लिस्ट को रद्द कर दिया है, जिसमें उन्होंने एडवांस आई सेंटर के प्रोफेसर एसके पांडव को वरिष्ठ मानते हुए विभागाध्यक्ष बनाने के निर्देश दिए थे। पीजीआई के इस आदेश के खिलाफ संस्थान के ही प्रो. अरुण जैन ने कैट में याचिका डाली। उनकी दलील थी कि वे सीनियर हैं। कैट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रो. जैन को ही सीनियर ही माना है। सीनियर होने के हिसाब से वे अब विभागाध्यक्ष का दावा ठोक सकते हैं।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह मामला यहीं ठहरने वाला नहीं है, दूसरा पक्ष इस मामले को हाईकोर्ट लेकर जा सकता है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि विभागाध्यक्ष का पद इन दोनों के पास जाने के बजाय पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम के पास ही रहेगा। एडवांस आई सेंटर की कमान उनके पास ही रहने वाली है। पीजीआई में वरिष्ठता का मामला काफी विवाद में रहा है। कई डिपार्टमेंट में कैट को ही आदेश जारी करना पड़ा है। एडवांस आई सेंटर में भी ऐसा कुछ हुआ।
पीजीआई की ओर से जारी वरिष्ठता की सूची में प्रो. अरुण जैन डा. पांडव से ऊपर थे। साल 2018 में अचानक डा. पांडव ने पीजीआई को दलील दी कि साल 1994 में उनका और डा. जैन का सिलेक्शन एक साथ हुआ था। इसमें डा. पांडव का नाम ऊपर था और दूसरे नंबर पर डा. जैन का, इसलिए उन्हें सीनियर माना जाए। पीजीआई ने डा. पांडव की दलील मानते हुए उन्हें विभागाध्यक्ष नियुक्त कर दिया। डा. जैन ने इस फैसले के खिलाफ कैट में याचिका दाखिल की। साथ ही हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया और कैट को निर्देश दिया कि वे जल्द ही इस मामले की सुनवाई करे। साथ ही पीजीआई को भी आदेश जारी करते हुए कहा कि जब तक वरिष्ठता का फैसला नहीं हो जाता, तब तक दोनों में से कोई विभागाध्यक्ष नहीं बनेगा। पीजीआई ने उस दौरान डा. पांडव को हटाकर आई सेंटर का चार्ज प्रो. जगतराम को दे दिया। कैट का कहना है कि साल 1994 से 2018 तक प्रो. अरुण जैन सीनियर थे तो डा. पांडव ने आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई। अचानक से आपत्ति का क्या मतलब है? उसके बाद कैट ने पीजीआई की वरिष्ठता सूची रद्द कर दी।