सिविल अस्पताल में सात बच्चे निमोनिया से पीड़ित मिले, स्पेशल आइसोलेशन वार्ड में पांच बच्चों के बेड पर 13 बच्चे भर्तीमाई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। मौसम में बदलाव बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। सुबह-शाम ठंड बढ़ने के कारण बच्चों में निमोनिया, छाती जाम और एलर्जी के केस बढ़ गए हैं। इन कारणों से अस्पताल में रोज दस बच्चे भर्ती हो रहे हैं। पंचकूला सेक्टर -6 सिविल अस्पताल की ओपीडी में वीरवार को मरीजों भीड़ उमड़ी रही। स्पेशल आइसोलेशन वार्ड में पांच बच्चों के बेड पर 13 बच्चे भर्ती हैं। वहीं रोजाना की ओपीडी में 250 की जगह अब रोजाना 300 बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने कहा कि मौसम में बदलाव का सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ रहा है।
ठंड बढ़ने के साथ प्रदूषित वातावरण बच्चों में निमोनिया व एलर्जी हो रही है। बच्चों के वार्ड में बने स्पेशल आइसोलेशन वार्ड में सिर्फ पांच बच्चों के लिए बेड की व्यवस्था है। विशेष बात यह है कि एलर्जी के मरीजों के चेस्ट एक्स-रे क्लियर आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि निमोनिया व एलर्जी में यही अंतर है। निमोनिया वाले बच्चों के चेस्ट एक्स-रे में धब्बे अलग ही दिखाई देते हैं। जबकि एलर्जी में ऐसा में नहीं होता, क्योंकि यह समस्या सांस की नली से संबंधित है।
पंचकूला में निमोनिया से पीड़ित बच्चों को इंजेक्शन व एलर्जी से पीड़ित बच्चों को नेब्युलाइज थैरेपी दी जा रही है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गगन सिंगला ने बताया कि खांसी व ठंड से बुखार आना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, थकान और कमजोरी, तेजी से सांस लेना निमोनिया के लक्षण हैं। वहीं एलर्जी के मामले में खांसी व सांस लेने में परेशानी होती है। जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में 30 बच्चे भर्ती हैं। इनमें से सात को निमोनिया है। जबकि अन्य एलर्जी से पीड़ित हैं।
ढाई माह से पांच साल वाले बच्चे अधिक
पंचकूला सिविल अस्पताल के पीएमओ डॉ. जितेंदर सिंह ने बताया कि ओपीडी में सबसे ज्यादा केस एलर्जी के हैं। कुछ बच्चों को भर्ती भी किया गया है। ढाई माह से पांच साल तक के बच्चे एलर्जी व निमोनिया से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
एलर्जी से पीड़ित बच्चों को लगा रहे नेब्युलाइजर मास्क
सिविल अस्पताल में एलर्जी से पीड़ित बच्चों को नेब्युलाइजर मास्क लगाए जा रहे हैं। इससे कई अभिभावक घबरा रहे हैं। उनका कहना है कि यह सांस के गंभीर मरीजों को दिया जा जाता है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि इनफेक्शन के मामले में ओरल नोजल मास्क लगाने से आराम मिल रहा है। यह सीधे सांस की नली पर असर करती है।
बचाव के उपाय
- डॉक्टर की सलाह पर टीके लगवाएं।
- बच्चों को लेकर घर से बाहर न निकलें।
-साफ सफाई करते समय बच्चों को अलग कमरे में बैठाएं।
- कपड़े साफ व गर्म पानी से धोएं।
-बाहर की हवा से जितना बचेंगे, उतना बेहतर।
- यदि किसी को खांसी, जुकाम है तो वह बच्चों से दूर रहे।
कोट
अस्पताल में मौसम में बदलाव के बाद निमोनिया और एलर्जी के मरीज बढ़े हैं। अभिभावकों को बेहतर सलाह के साथ बच्चों को इलाज दे रहे हैं। - जितेंदर सिंह, पीएमओ, पंचकूला सिविल अस्पताल