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कोरोना काल में प्रबंधन के लिए कैप्टन ने पीएम मोदी से मांगे 200 करोड़, कहा- गंभीर नहीं पंजाबी

Thu, 24 Sep 2020 04:14 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
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कोविड के बढ़ते मामलों के कारण मेडिकल ऑक्सीजन की कमी पैदा होने की आशंका के मद्देनजर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को प्रधानमंत्री से अन्य राज्यों से उचित सप्लाई यकीनी बनाने की मांग की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 200 करोड़ रुपये जारी करने की मांग भी की।
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विशेषज्ञों की तरफ से पराली जलाने से कोविड की स्थिति और गंभीर होने की आशंका के संदर्भ में सीएम ने धान की पराली के प्रबंधन की लागत के भुगतान के लिए किसानों को केंद्र की तरफ से वित्तीय सहायता देने की मांग दोहराई।

उन्होंने कहा कि चाहे राज्य सरकार पराली जलाने की समस्या को कोविड के साथ जोड़कर किसानों और आम लोगों को जागरूक करने की व्यापक स्तर पर मुहिम चला रही है लेकिन यह जरूरी हो जाता है कि भारत सरकार धान की पराली के प्रबंधन के लिए किसानों को राज्य सरकार की मार्फत धान पर 100 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजा देने के लिए कदम उठाए।
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इन राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए बैठक में
बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन के अलावा छह अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। इन 7 राज्यों में महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब शामिल हैं। इन सूबों में कुल कोविड मामलों में का 62 प्रतिशत है।

धार्मिक स्थलों से घोषणाओं के जरिये जागरूकता लाएं: मोदी

प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री की अपीलों पर गौर करने का वादा करते हुए सुझाव दिया कि राज्य सरकार को कोविड संबंधी जागरूकता प्रयासों में सिविल सोसायटियों को बड़े स्तर पर शामिल करने और गुरुद्वारों व अन्य धार्मिक स्थानों से घोषणाएं करके जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने पॉजिटिविटी दर को 5 प्रतिशत से कम करने और कोविड से मौतों की दर को नीचे लाने के लिए पंजाब की योग्यता में भरोसा जाहिर किया।

पंजाब में नहीं है कोई लिक्विड आक्सीजन उत्पादक
सीएम ने अपील की कि कंट्रोलर ऑफ एक्सप्लोसिव, नागपुर को एचएलएल की तरफ से प्रधानमंत्री स्वस्थ सुरक्षा योजना के तहत सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला में स्थापित किए जाने वाले प्लांट के लिए लाइसेंस की विनती को मंजूरी दी जाए। सूबे के सरकारी और निजी अस्पताल मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई की कमी का सामना कर सकते हैं, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत करवाया कि मेडीकल आक्सीजन का कोई उत्पादक न होने के कारण राज्य लिकुअड आक्सीजन के लिए बड़े स्तर पर तीन बड़े उत्पादकों पर निर्भर है।

उन्होंने बताया कि यह प्लांट बुराई (हिमाचल प्रदेश), देहरादून (उत्तराखंड) और पानीपत (हरियाणा) में हैं लेकिन देहरादून और पानीपत के प्लांट राज्य की मांग के मुताबिक आक्सीजन सप्लाई नहीं कर रहे। उन्होंने बताया कि यदि पानीपत रिफायनरी की सप्लाई घटा दी जाए तो पानीपत प्लांट राज्य को अतिरिक्त सप्लाई कर सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार अपने स्तर पर उद्योगों के साथ औद्योगिक आक्सीजन को मेडिकल ऑक्सीजन में तबदील कर देने के लिए बातचीत कर रही है।
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इमरजेंसी रिस्पांस फंड से अब तक मिले 131.22 करोड़

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने कोविड -19 इमरजेंसी रेस्पांस फंड से 131.22 करोड़ जारी कर दिए हैं और सारी रकम का प्रयोग सर्टिफिकेट (यूसी) जमा करवाने के बाद राज्य की तरफ से भारत सरकार को 200 करोड़ तुरंत जारी करने की विनती की गई थी और रकम का इंतजार अभी जारी है।

कोविड संबंधी हिदायतों को गंभीरता से नहीं लेते पंजाबी: कैप्टन
कैप्टन ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या पंजाबियों की ‘चलता है’ की आदत है, जिस कारण वह छोटे-मोटे लक्षणों को गंभीरता के साथ नहीं लेते। उन्होंने और जानकारी दी कि इस समस्या में और भी विस्तार इस कारण हुआ है कि कुछ राजनैतिक पार्टियों जैसे कि लोक इंसाफ पार्टी की तरफ से मास्क पहनने के खिलाफ प्रचार किया जा रहा है, जिसके निष्कर्ष के तौर पर भीड़भाड़ वाले इलाकों में 25 प्रतिशत लोग मास्क नहीं डाल रहे और पुलिस को प्रति दिन 4000 -5000 उल्लंघन करने वालों को जुर्माना लगाना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने हाल ही में कुछ शरारती तत्वों और राजनैतिक तौर पर सम्बन्ध रखते कुछ लोगों की तरफ से किये भ्रामक प्रचार करने का भी जिक्र किया जिन्होंने बहुत योजनाबद्ध ढंग से मुहिम चला कर कोविड को भारत सरकार और पंजाब सरकार की साजिश बताया और अंग निकालने की गलत सूचना फैलायी। उन्होंने बताया कि यह लोग सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय थे और कुछ पंचायतों ने टेस्ट करवाने के विरुद्ध प्रस्ताव भी पास कर दिए।
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