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अपराजिता: सात महीने से बिना छुट्टी लिए कोरोना संक्रमित मरीजों की सेवा में जुटीं डॉक्टर श्वेता

Thu, 24 Sep 2020 04:04 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोरोना योद्धा डॉ. श्वेता - फोटो : अमर उजाला
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मुश्किल हालात का सामना करना डॉक्टर श्वेता तलाती से सीखना चाहिए। खुद अस्थमा से जूझ रहीं श्वेता सात महीने से लगातार कोरोना से संक्रमित मरीजों की सेवा में जुटी हैं। रोजाना 900 मरीजों के खाने की व्यवस्था कराती हैं। पीजीआई के मेन ऑपरेशन थियेटर कांप्लेक्स की जिम्मेदारी भी इन्हीं के कंधों पर है। श्वेता का कहना है कि इस महामारी के दौर में अगर हम अपने बारे में सोचने लगे तो देशहित और मरीजों के हित से जुड़े संकल्प झूठे साबित हो जाएंगे।
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डॉ श्वेता पीजीआई में ज्वाइंट मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एंड एसोसिएट प्रोफेसर इन डिपार्टमेंट ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के पद पर तैनात हैं। इनके जिम्मे मरीजों की डाइट के साथ ही हॉस्पिटल के मेन ऑपरेशन थियेटर कांप्लेक्स से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां हैं। इसके अलावा पॉजिटिव स्टाफ और डॉक्टरों के क्वारंटीन से संबंधी काम भी डॉक्टर श्वेता देख रही हैं। श्वेता का कहना है कि नारी को शक्ति स्वरूपा कहा जाता है, ऐसे में अगर हम थक गए तो फिर यह मिसाल गलत साबित हो जाएगी।
 
लॉकडाउन में की राशन की व्यवस्था
श्वेता ने बताया कि शुरुआती दौर में लॉकडाउन के दौरान डिस्पोजल, राशन, फल, सब्जी और दूध की व्यवस्था करना मुश्किल काम था। लेकिन उस स्थिति को भी सूझबूझ और सहयोग के बल पर सामान्य किया गया। डाइट डिपार्टमेंट में सुबह 6 बजे से रात के 10 बजे तक लगातार काम चलता है। इस दौरान मरीजों के सुबह के नाश्ते के साथ रात के भोजन तक की व्यवस्था करनी होती है। इस बीच अगर अतिरिक्त मरीजों के भोजन की व्यवस्था का निर्देश मिलता है तो उसे भी पूरा किया जाता जाता है।
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दादा की लाड़ली थी, अफसोस उनके अंतिम दर्शन नहीं कर सकी

कोरोना महामारी के दौरान श्वेता को अपने दादाजी को खोने का दुख भी झेलना पड़ा। श्वेता ने बताया कि वह अपने दादाजी की लाडली थी। उनके साथ श्वेता की बचपन की यादें जुड़ी हैं। इसके बावजूद कोरोना के कारण वह अपने दादाजी के अंतिम दर्शन करने उज्जैन नहीं जा सकीं। श्वेता का कहना है कि दादाजी ने हमेशा अपने फर्ज और कर्तव्य को प्रधानता देने की सीख दी थी। ऐसे में इस महामारी के दौर में फर्ज से पीछे हटकर दादाजी से मिली सीख को कैसे नजरअंदाज कर देती।

सांसों की कमजोर डोर पर कर्तव्य पड़ रहा भारी  
डॉक्टर श्वेता खुद सांस की मरीज हैं। उन्हें अस्थमा है। इसके कारण कई बार उन्हें अचानक सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। इसके बावजूद वह लगातार 7 महीने से कोरोना के मरीजों के साथ ही नॉन कोविड- मरीजों से जुड़ी कई जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वाह कर रही हैं। श्वेता ने बताया कि 20 मार्च से अब तक उन्होंने एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली है। राष्ट्रीय अवकाश के साथ ही रविवार को भी वह और उनके कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं। एक बार उनकी सहयोगी के पॉजिटिव आ जाने पर उन्हें 5 दिन क्वारंटीन होना पड़ा था लेकिन उस दौरान भी उन्होंने अपना काम जारी रखा।  

पति की तबीयत खराब होने पर भी ड्यूटी को जारी रखा
डॉ. श्वेता के पति डॉ आशीष भी पीजीआई में ही कार्यरत हैं। उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई थी। पति की बीमारी से श्वेता का मनोबल काफी प्रभावित हुआ, फिर भी उन्होंने खुद को संभाला और अपनी ड्यूटी को जारी रखा। श्वेता का कहना है कि संकट की घड़ी में पति और उनके बेटे अक्षत ने उनका भरपूर सहयोग किया है। उनके प्यार और साथ के बल पर ही कठिन समय में भी उन्होंने पूरी तन्मयता से अपना फर्ज निभाया है।
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