चंडीगढ़। गेहूं की खरीद के लिए पंजाब सरकार ने आढ़तियों द्वारा मुहैया करवाए गए अच्छे हालत वाले इस्तेमाल किए हुए बारदाने में गेहूं की भराई करने की मंजूरी दे दी है। पंजाब की किसी भी मंडी में बारदाने की कमी न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गेहूं की खरीद की प्रगति का जायजा लिया। सरहदी जिलों अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन और फिरोजपुर में खरीद की गति के धीमा होने के मुद्दे पर यह स्पष्ट किया गया कि इन इलाकों में गेहूं के दाने सिकुड़ गए हैं, जिस कारण इनकी खरीद से पहले भारत सरकार से खरीद संबंधी मापदंडों में ढील देने की जरूरत है। पंजाब सरकार ने 16 अप्रैल को भारत सरकार को पहले ही लिख दिया था कि अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का जिलों में 11 प्रतिशत तक सिकुड़े और टूटे हुए व 10 प्रतिशत तक बदरंगा हुए गेहूं के दानों संबंधी बिना किसी कीमत कटौती के एकसमान मापदंडों में तुरंत ढील दी जाए। हालांकि, भारत सरकार की तरफ से इस संबंधी जवाब आना अभी बाकी है।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खाद्य एवं सिविल सप्लाई मंत्री और प्रमुख सचिव, खाद्य एवं सिविल सप्लाई को यह मामला तुरंत सुलझाने के लिए भारत सरकार के अपने हमरुतबा व्यक्तियों के साथ बातचीत करने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य की खरीद एजेंसियों के मैनेजिंग डायरेक्टरों को राज्य में मंडियों का दौरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि यदि किसी भी किसान की शिकायत ध्यान में आती है तो उसे पहल के आधार पर सुलझाया जाए।
इन जिलों से आईं शिकायतें : अमृतसर (राजस्व जिला अमृतसर और तरनतारन) में एफसीआई और राज्य की खरीद एजेंसियों द्वारा गेहूं के नमूनों का साझे रूप में अध्ययन किए जाने के बाद यह सामने आया कि इन जिलों की कुछ मंडियों में बदरंगा हुए दानों की मात्रा 5 प्रतिशत और सिकुड़े और टूटे हुए दानों की मात्रा 11 प्रतिशत तक पाई गई है। यह निर्धारित सीमा से ज्यादा है। इसी तरह फाजिल्का के मामले में भी सिकुड़े और टूटे हुए दानों की मात्रा 9.9 प्रतिशत तक पाई गई जो कि निर्धारित सीमा 6 प्रतिशत से अधिक है।