चंडीगढ़। विधानसभा में मंगलवार को हरियाणा लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण विधेयक, 2021 पारित हो गया। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा। इसके बाद पेपर लीक या नकल के दोषी दो साल तक कोई भर्ती परीक्षा नहीं दे सकेंगे। दो से दस साल सजा की सजा और पांच हजार से दस लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान भी रहेगा।
कांग्रेस ने सदन में पुलिस भर्ती पेपर लीक की सीबीआई जांच कराने को लेकर हंगामा किया, लेकिन सरकार तैयार नहीं हुई। कांग्रेस विधायक दल इससे नाराज होकर वॉक आउट कर गया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों को लेकर किसी परीक्षा में नकल या पेपर लीक होता है तो उसके दोषियों को भी नए कानून अनुसार सजा मिलेगी। सरकार ने इसके लिए एलआर यानी लीगल रिमेंब्रेंस से कानूनी राय ली है। विधेयक को लेकर विपक्ष की अधिकांश आपत्तियां दूर की गईं, वहीं सुझावों को शामिल कर विधेयक का नया ड्राफ्ट सदन पटल पर रखा। सोमवार को सदन में चर्चा के लिए पेश विधेयक मंगलवार को वापस लिया। कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विधायक बीबी बत्रा, वरुण चौधरी व जगबीर मलिक ने नए विधेयक में भी अनेक खामियां गिनाई व इसे जल्दबाजी में पारित न करने की सलाह दी। हुड्डा ने कहा कि विश्वविद्यालय स्वायत संस्थान हैं, इन्हें कानून के दायरे में न लाया जाए। यह उनकी स्वायतता में दखल होगा। इसके लिए समिति बनाकर अध्ययन कराएं।
विश्वविद्यालयों की स्वायतता पर नहीं पड़ेगा असर : मनोहर
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि नया कानून परीक्षाओं के दौरान नकल को बढ़ावा देने के भागीदारों पर लागू होगा। इससे विश्वविद्यालयों की स्वायतता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। किसी भी भर्ती के लिए यूनिवर्सिटी में होने वाली परीक्षा के दौरान नकल पर अंकुश के लिए यह काम करेगा। पेपर सेटर से परीक्षा होने तक किसी भी स्तर पर अनुचित साधनों के प्रयोग को बढ़ावा देने के दोषी इसके दायरे में आएंगे। अगर पेपर लीक या नकल के कारण परीक्षा रद्द होती है तो दोबारा परीक्षा होने पर पूर्व आवेदनकर्ताओं से शुल्क नहीं लिया जाएगा।
कानून के तहत बनाए नियम सदन में रखे जाएंगे
नए कानून के तहत पेपर लीक व नकल रोकने के लिए बनाए जाने वाले नियमों को सरकार विधानसभा में सदन पटल पर रखेगी। विधेयक के खंड 13 में इसका प्रावधान किया गया है। नए कानून की गजट अधिसूचना के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए नियम बनाना जरूरी है।
नए कानून में ये भी होंगे प्रावधान
-परीक्षार्थी के नकल करने, कराने या उकसाने पर दो साल सजा, पांच हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान
-निरीक्षण टीम, परीक्षा अधिकारी, आयोग के सदस्यों को केंद्र में प्रवेश करने से रोकने या धमकी देने पर भी दो सजा, पांच हजार जुर्माना लगेगा
-परीक्षा आयोजित करने में शामिल व्यक्ति पेपर लीक या नकल कराने में शामिल पाया जाता है तो सात वर्ष सजा व एक से तीन लाख रुपये जुर्माना
-परीक्षा अधिकारी के साथ मिलकर पेपर लीक, नकल कराने का षड्यंत्र रचने पर सात से दस साल सजा व दस लाख रुपये जुर्माना
-कानून के उपबंधों को लागू करने में अगर कोई दिक्कत सरकार को आती है तो इसके लागू होने से दो वर्ष के भीतर राजपत्र में आदेश प्रकाशित कर असंगत नियमों को हटा सकती है।
-परीक्षा आयोजित करने में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 21 के तहत लोक सेवक समझा जाएगा।