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Panchkula News: सात साल पहले शुरू बाईपास का काम आज तक नहीं हुआ पूरा

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पंचकूला सूरज पर सुखो माधुरी रोड पर बनाया गया अंडरपास।
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माई सिटी रिपोर्टर
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पंचकूला। बद्दी से पंचकूला का सफर अभी आसान नहीं है, क्योंकि सूरजपुर-सुखोमाजरी बाईपास पर आरयूबी का दूसरा बैरल डालने का काम दो माह से अधर में लटक हुआ है। इस वजह लोगों को महज 15 मिनट का सफर पिंजौर में लगने वाले जाम की वजह से करीब एक घंटे में तय करना पड़ता है। इस मार्ग के खुलते ही बद्दी तक का सफर करीब छह किलोमीटर का रह जाएगा। अभी लोगों को करीब 12 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है।
दरअसल एनएचएआई के इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों का दावा है कि विभाग ने रेलवे से एक माह पहले दूसरे बैरल के पांच बॉक्सेज डालने के लिए आठ घंटे ट्रैफिक का मेगा ब्लॉक मांगा था। इसकी अनुमति विभाग से अभी तक नहीं मिली है। इसके चलते दो माह से प्रोजेक्ट का काम लटक गया है। अंबाला मंडल के अधिकारियों का कहना है कि विभाग के पास अब तक ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं पहुंचा है। मुख्यालय से अनुमति मिलते ही रेलवे का अंबाला मंडल ब्लॉक देने के लिए तैयार है। पिछले साल 2023 अक्तूबर में सूरजपुर-सुखोमाजरी बाईपास पर आरयूबी का पहला बैरल डाला गया था। उसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने दूसरे बैरल के लिए पांच बॉक्स तैयार करवाए हैं। इन बॉक्स को आरयूबी में फिट करने के लिए विभाग रेलवे की तरफ से दूसरा ट्रैफिक ब्लॉक चाहिए।
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पिंजौर में भारी वाहनों से लगता है जाम
पिंजौर शहर में छोटे-बड़े करीब 70 फीसदी वाहन बद्दी, बरोटीवाला व नालागढ़ की तरफ जाते हैं। सैकड़ों कारखानों में जाने वाले भारी भरकम बड़े-बड़े वाहन पिंजौर के तंग बाजार से निकलते हैं, जिस कारण अवसर वहां जाम की समस्या रहती है। इसके समाधान के लिए सरकार ने पिंजौर को बाईपास करने के लिए सूरजपुर से सुखोमाजरी बाईपास को मंजूरी देकर निर्माण 2017 में शुरू करवाया था। जिसके लिए 1 मई 2017 को केंद्रीय मंत्री ने बाईपास का शिलान्यास किया था। 7 वर्ष बीत जाने के बाद भी बाईपास का काम पूरा नहीं हो पाया है। इसका खामियाजा प्रतिदिन हजारों वाहनों को परेशान होकर भुगतना पड़ता है।

बाईपास का 95 फीसदी काम पूरा
बाईपास का निर्माण कार्य करीब 95 फीसदी पूरा हो चुका है। महज पांच फीसदी काम शेष बचा है। 7.7 किलोमीटर के इस परियोजना पर करीब 84 करोड़ रुपये खर्च आया है। यह प्रोजेक्ट 2020 में पूरा होना था, लेकिन चार साल बाद भी प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया। हालांकि प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं होने के बाद कई बार लोगों ने विरोध भी किया। इस बाईपास निर्माण के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2007 में गांव रामपुर सियुडी, रजीपुर, सूरजपुर, मानकपुर नानक चंद, मानकपुर ठाकुरदास, लोहगढ़ और धमाला की जमीनों को तत्काल प्रभाव से अधिग्रहण किया गया था।
इस भूमि को एनएचएआई द्वारा यादवेंद्र गार्डन और एचएमटी के पास से पंचकूला- शिमला हाईवे को पिंजौर- नालागढ़ बद्दी हाईवे से जोड़ने के लिए अधिग्रहित किया गया था, ताकि बद्दी- बरोटीवाला हिमाचल प्रदेश एक बड़ा औद्योगिक केंद्र है जहां पर 3500 से ज्यादा उद्योग हैं। यहां से रोजाना हजारों लोग छोटे बड़े वाहनों से अपने रोजगार के लिए बद्दी आते और जाते हैं। इसलिए इस भारी ट्रैफिक को सूरजपुर-सुखोमाजरी बाईपास पर स्थानांतरित करने और ट्रैफिक जाम से प्रतिदिन होने वाली उन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यह परियोजना बनाई गई थी।


दूसरा प्रोटेक्शन गर्डर डालने के लिए रेलवे से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलने ही गर्डर डालने काम शुरू कर दिया जाएगा। 42 मीटर की पटरी हटाकर गर्डर लगाया जाना है। - अमन चौधरी, जेई, एनएचएआई पंचकूला
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आठ घंटे की ब्लॉक के लिए रेलवे तैयार है। एनएचएआई मुख्यालय में अनुमति मांगे। मुख्यालय की ओर से निर्देश मिलते ही ब्लॉक दे दिया जाएगा। अभी अंबाला मंडल को रेलवे के मुख्यालय की तरफ से ब्लॉक देने का कोई निर्देश नहीं मिला है। - मनदीप सिंह भाटिया, डीआरएम अंबाला।
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