फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

12 दिन में हजारों करोड़ रुपए का कोराबार प्रभावित

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की एनसीआर में आने वाले 14 जिलों के डीजल से चलने वाले उद्योगों पर लगी पाबंदियों से हजारों करोड़ रुपये का कोराबार प्रभावित हुआ है। 12 दिन तक करीब 30 हजार छोटे बड़े उद्योगों के सुचारू नहीं हो पाने के लिए सभी उद्योगों को काफी नुकसान हुआ है। अकेले चावल कारोबार को 120 करोड़ रुपये का झटका लगा है।
विज्ञापन

इसके अलावा, काफी संख्या में एक्सपोर्टर्स और मिलर के करार प्रभावित हुए हैं। सीएमआर का काम करने वाले मिलर एफसीआई को समय पर चावल डिलिवरी नहीं दे पाए, जबकि विदेशों में चावल एक्सपोर्ट करने वालों को भी दिक्कत झेलनी पड़ी है। चावल कारोबारियों का कहना है कि प्रतिदिन इंडस्ट्री को 10 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। इसके अलावा, नए नियमों में पांच दिन मिल चलाने से भी उद्योगों के खर्च बढ़ेंगे। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया का कहना है कि हर सप्ताह मिल को बंद करना और चलाने से मिलों में न केवल एनर्जी खर्च बढ़ेगा, बल्कि इससे चावल की क्वालिटी पर भी असर पड़ेगा। प्रदूषण कम करने के लिए सरकार नए सिरे से विचार करना चाहिए। केवल उद्योगों को बंद करना इसका समाधान नहीं है। क्योंकि इंडस्ट्री से लाखों मजदूर और कर्मचारी जुड़े हुए हैं।
अकेले पानीपत में 10 हजार छोटे उद्योग रहे प्रभावित
अकेले पानीपत में 10 हजार छोटे-बड़े उद्योग हैं। इनमें एक्सपोर्ट हाउस, मिंक कंबल, पोलर कंबल, 3डी बेड शीट प्लांट के साथ ही ओपन एंड स्पिनिंग प्लांट शामिल हैं। जिससे 5 लाख से अधिक मजदूरों को भी दिक्कत आई। पानीपत इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सिंह सचदेवा ने कहा कि इससे अकेले पानीपत को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। पानीपत इंडस्ट्री सालाना 50 हजार करोड़ का कारोबार करती है। इसी प्रकार बहादुरगढ़ और राई में औद्योगिक क्षेत्र हैं। यहां पर हजारों की संख्या में फैक्टरी हैं। करनाल में चावल और कृषि यंत्रों के प्लांट हैं और कार्य प्रभावित हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें