फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बजट : केंद्रीय बजट : कर्मचारी मायूस, इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं होने से निराश

विज्ञापन
विज्ञापन
पंचकूला। केंद्रीय बजट को जिले के लोगों ने चुनावी और निराश करने वाला बताया है। व्यापारी, कर्मचारी, वरिष्ठ नागरिकों, वकीलों और पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना काल में टैक्स छूट की उम्मीद थी, लेकिन कोई छूट नहीं मिलने से उनको निराशा मिली है। इन लोगों का कहना है कि उनको उम्मीद थी कि कोरोना महामारी और महंगाई के बीच कम से कम उन्हें टैक्स में कोई छूट जरूर मिलेगी, लेकिन इस बार वित्तमंत्री ने कोई छूट नहीं दी है। टैक्स स्लैब में जिस दर से पहले टैक्स लगता था, उसी तरह लगेगा। आम आदमी को आखिरी बार आठ साल पहले ही आयकर में छूट मिली थी।
विज्ञापन

कोरोना काल में नौकरी पेशा वालों को उम्मीद थी कि टैक्स स्लैब में राहत मिलेगी, लेकिन बजट में टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है। व्यक्तिगत करदाताओं के लिए बुनियादी छूट की सीमा में आखिरी बार बदलाव 2014 में हुआ था। - यज्ञदत्त शर्मा, एडवोकेट पंचकूला।
इस बजट में नौकरी करने वालों को कोई राहत नहीं दी गई है। आम जनता टैक्स के बोझ के नीचे दबी हुई है। यह महज चुनावी बजट है। आठ साल से नौकरी पेशा वाले आयकर में छूट की आस लगाए बैठे थे, लेकिन आयकर छूट नहीं मिलने से निराश हैं। -योगेंद्र क्वात्रा, सेक्टर-20 पंचकूला।
विज्ञापन

नौकरी-पेशा लोगों को बजट में सबसे ज्यादा आयकर छूट को लेकर उम्मीदें रहती हैं, लेकिन वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में आयकर छूट को लेकर कोई ऐलान नहीं किया है। इस बजट से आम आदमी के हाथ तंगी और निराशा लगी है। इस समय देश का युवा वर्ग बेरोजगारी से परेशान हो रहा है। - रवि कुमार काजल, एडवोकेट।
केंद्र सरकार द्वारा वित्तवर्ष 2022-23 का बजट मध्यवर्ती है। इस वर्ष बजट में नौकरीपेशा लोगों के आयकर में कोई भी बदलाव न देकर सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया गया है। पेंशन ले रहे कर्मचारियों को कुछ रियायत देकर टैक्स की रिटर्न भरने में रियायत मिली है, जिसका पेंशनधारी स्वागत करते हैं। इसके अलावा रिटर्न में गलती हो जाने पर सुधार के मौके भी दिए गए हैं। - एसके नैय्यर, रिटायर्ड सहायक निदेशक, भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट बोर्ड, चंडीगढ़।
वित्तमंत्री ने वेतनभोगी और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बजट में कोई राहत नहीं दी है। इस वर्ग के लिए ना टैक्स स्लैब में बदलाव किया गया है, ना ही टैक्स छूट के दायरे को बढ़ाया गया है। महंगाई की मार झेल रहे वेतनभोगी वर्ग के साथ अन्याय किया गया है। नागरिक कई वर्षों से स्माल सेविंग स्कीम में जमा राशि की सीमा 15 लाख से बढ़ाकर 30 लाख रुपये करने की मांग कर रहे थे। वरिष्ठ नागरिक अपनी जमा राशि पर कम से कम 10 फीसदी ब्याज की आस लगाए बैठे थे, सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को राहत ना देकर निराश किया है। - भारत हितैषी, पूर्व बैंक अधिकारी।
वित्तमंत्री द्वारा पेश केंद्रीय बजट विभागीय लेखा-जोखा है। इसमें कारपोरेट को टैक्स में फायदा दिया गया है। इस बजट से आम आदमी को राहत नहीं है। -सुभाष पपनेजा, निवासी सेक्टर-16
कोरोना महामारी और महंगाई के बीच नौकरीपेशा वालों को कम से कम टैक्स स्लैब में राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन राहत नहीं मिली। - जगदीश भगत सिंह, निवासी महेशपुर पंचकूला।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें