चंडीगढ़। हरियाणा सरकार के तात्कालिक खर्चे इस वित्तीय वर्ष में बढ़े हैं, जिसका असर वार्षिक बजट पर भी पड़ा। इससे साल भर में सरकार का बजट 22 हजार करोड़ रुपये बढ़ गया। सरकार को तीन अनुपूरक मांगों के जरिये बजट वृद्धि की मंजूरी विधानसभा में लेनी पड़ी। सरकार राजस्व संग्रहण तंत्र को और प्रभावी बनाकर इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ की भरपाई करेगी।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बीते वर्ष 1.55 लाख करोड़ का बजट पेश किया था। इसमें राजस्व खर्च के लिए रखी गई राशि कम पड़ गई, सरकार को अति आवश्यक कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान करना पड़ा। इससे अब प्रदेश का बजट बढ़कर 1.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने कहा है कि सरकार फिजूलखर्च को रोकेगी। गैर जरूरी कार्यों पर धन व्यर्थ नहीं किया जाएगा। राजस्व खर्च बढ़ने से खजाने पर अतिरिक्त भार पड़ा है। कर संग्रहण प्रणाली को और मजबूत करेंगे, अधिक राजस्व जुटाकर खजाने को भरा जाएगा।
उन्होंने कहा कि एकाएक उत्पन्न तात्कालिक खर्चों को पूरा करने के लिए 2021-22 के बजट अनुमान में स्वीकृत राशि से अधिक पैसे के लिए अनुपूरक बजट लेना पड़ा। शुक्रवार को विधानसभा में अनुपूरक मांगों की राजस्व खर्च से जुड़ी तीसरी किस्त 1768.45 करोड़ रुपये मंजूर कराई गई है। पहली अनुपूरक मांग 12701 करोड़ रुपये व दूसरी 7312 करोड़ थी। तीनों किस्त को मिलाकर संशोधित बजट अब 177433.57 करोड़ रुपये हो गया है। इसमें राजस्व खर्च 1.33 लाख करोड़ व पूंजीगत व्यय 44317 लाख करोड़ रुपये है। तीसरी किस्त में पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर 868 करोड़ रुपये व सामाजिक सुरक्षा व कल्याण पर 900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि 31 मार्च, 2022 को खत्म होने वाले वित्त वर्ष के मद्देनजर मंजूर करवाई गई है।