चंडीगढ़। बसपा के कार्यक्रमों का सार्वजनिक मंच पर विरोध करना पंजाब के फिल्लौर विधानसभा के कार्यकर्ताओं को महंगा पड़ गया। पार्टी आलाकमान ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया है। अब कोई भी कार्यकर्ता अपने पदनाम का प्रयोग नहीं कर सकेगा। आलाकमान ने यह फैसला पार्टी की तीन सदस्यीय कमेटी की जांच के बाद लिया है।
पार्टी के प्रधान जसवीर सिंह गढ़ी ने बताया कि पिछले कई दिनों से फिल्लौर विधानसभा से कुछ पदाधिकारियों के द्वारा पार्टी अध्यक्ष मायावती के आदेशों के साथ-साथ पार्टी के फैसलों को चुनौती देने वाले सोशल मीडिया पर पार्टी विरोधी कार्यक्रमों की घोषणा कर रहे थे। हालांकि पिछले एक माह में फिल्लौर के इन अनुशासनहीन नेताओं को प्रदेश के नेताओं ने जालंधर स्थित प्रदेश कार्यालय में कई बार समझाया। इसके बाद भीपार्टी विरोधी गतिविधियां जारी रहीं। प्रदेश नेतृत्व ने इसकी सूचना पंजाब प्रभारी को दीं। उनकी ओर से पार्टी की तीन सदस्यीय कमेटी ने पूरे मामले की जांच की, जांच में आरोप की पुष्टि के बाद आलाकमान ने फिल्लौर विधानसभा की पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया। अगले आदेश तक फिल्लौर विधानसभा का कोई भी नेता अपने साथ वर्तमान पद का प्रयोग नहीं करेगा।