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विजयदशमी पर सेक्टर-17 में हुआ सिंदूर खेला, महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगा अखंड सुहाग का वरदान मांगा

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सिंदूर खेला भाग लेती महिलाएं। - फोटो : PKL OFFICE
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पंचकूला। सेक्टर-17 के कम्युनिटी सेंटर में बंगीय परिषद की तरफ से आयोजित दुर्गा पूजा में दशमी की पूजा की गई। पूजा के दौरान बंगाली समुदाय की महिलाओं ने सिंदूर से दर्पण बनाकर उसको विसर्जित किया। उसके बाद दधि कर्म बांटा गया, जिसमें केला, दही और चिड़वा को मिक्स किया गया था। सिंदूर उत्सव में महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाया और माता से अखंड सुहाग का वरदान मांगा। इसके बाद सिंदूर खेला का उल्लास उमड़ पड़ा। परंपरागत ढाक की थाप ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाकर पर्व की खुशियां मनाई। समारोह में सभी पारंपरिक बंगाली परिधान में थे। सुमंतो घोष ने बताया कि सिंदूर खेला में महिलाओं ने पहले मां को सिंदूर लगाया और इसके बाद अन्य महिलाओं के साथ सिंदूर खेला। बाद में मूर्ति को घग्गर नदी में विसर्जित किया गया। इस मौके पर सुमंतो घोष, तपन, सुजीत दास, अतनु बंधो उपाध्याय पार्थो बनर्जी, सुबेंदू पात्रा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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क्या है मान्यता
परिषद के सदस्य सुमंतो घोष ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा नवरात्रि में नौ दिनों के लिए अपने घर यानी मायके आती हैं। इस दिन ज्यादातर महिलाएं बंगाली साड़ी ही पहनती हैं। लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी इस पर्व की पहचान बन गया है। उन्होंने बताया कि रस्म मां दुर्गा को विदाई देने के लिए मनाई जाती है। बंगाली रीति रिवाज में सिंदूर खेलने की परंपरा करीब 450 साल पुरानी है। इस दिन विवाहित महिलाएं मां दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी का शृंगार कर उनकी पूजा करती हैं।
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