जजपा विधायक देवेंद्र सिंह बबली व भाजपा विधायक कमल गुप्ता।
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हरियाणा मंत्रिमंडल के ताजा विस्तार ने अनेक विधायकों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। भाजपा और जजपा के कुल मिलाकर 6 से 7 विधायक मंत्री बनना चाह रहे थे लेकिन देवेंद्र बबली जजपा नेतृत्व पर दबाव बनाकर सरकार का हिस्सा बनने में सफल रहे। डॉ. कमल गुप्ता ने संघ के रिश्तों और अपनी बेबाक छवि के कारण झंडी पा ली।
दोनों विधायकों ने आम से खास बनने के लिए लंबा संघर्ष किया है। अब उन्हें सरकार के साथ पार्टी और हलके के साथ ही प्रदेश की जनता की उम्मीदों पर भी खरा उतरना होगा। जजपा में अमरजीत ढांडा को उम्मीद थी कि वे मंत्री बनेंगे, मगर वह पार्टी के शीर्ष नेताओं पर दबाव बनाने में सफल नहीं हो पाए। बबली ने पार्टी से सीधा लोहा भी लिया लेकिन अपनी बात मनवाने में सफल रहे।
भाजपा में डॉ. अभय यादव व दीपक मंगला को विस्तार में एडजस्ट होने की उम्मीद थी लेकिन उनसे अधिक समर्थन जुटाने में गुप्ता सफल रहे। वैश्य समुदाय के अधिकतर विधायकों का समर्थन उन्हें मिला। गुप्ता का जन्म हरियाणा के ही गुरुग्राम में हुआ है, उनके पिता डाक विभाग में पोस्ट मास्टर थे।
डॉ. गुप्ता की स्कूली शिक्षा चरखी दादरी से हुई। हिसार में मेडिकल प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर कमल गुप्ता ने भाजपा टिकट पर 1996 से चुनाव लड़ना शुरू किया। 2001 में भी लड़े पर लगातार हारे। मनोहर लाल की पिछली सरकार में वह 2 साल तक संसदीय सचिव भी रहे लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप की वजह से हटना पड़ा।
देवेंद्र बबली लंबे समय से आंखों के चेकअप कैंप, गरीब कन्याओं के विवाह, युवाओं के लिए खेल आदि जैसे कई समाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन टोहाना में करवाते आ रहे हैं। वह टोहाना के गांव बिढाईखेड़ा के रहने वाले हैं। किसान परिवार से संबंध रखने वाले बबली व्यवसायी भी हैं। स्वतंत्रता सेनानी परिवार से संबंध रखने वाले बबली अपने दादा को प्रेरणा स्त्रोत मानते हैं। इनके दादा कैप्टन उमराव सिंह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में कैप्टन थे।