मानदेय में कटौती पर जताई नाराजगी, मांगें पूरी नहीं होने पर 21 जुलाई को प्रदर्शन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरवाला। आशा वर्कर यूनियन के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को पंचकूला स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मुख्यालय में निदेशक विजेंद्र राव सिंह से मुलाकात कर आशा वर्करों की समस्याओं और मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने मानदेय में कटौती पर नाराजगी जताते हुए विभिन्न मांगों के जल्द समाधान की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में यूनियन की राज्य प्रधान सुनीता, राज्य सचिव रानी, पंचकूला जिला प्रधान वंदना और कुरुक्षेत्र जिला प्रधान पिंकी सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे। यूनियन नेताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आशा वर्करों को दिए जाने वाले मानदेय में लगातार कटौती की जा रही है, जिससे उनमें रोष है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा वर्करों को उनके कार्य के अनुरूप सुविधाएं और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल रही हैं। महंगाई के दौर में उन्हें केवल प्रोत्साहन राशि पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो उनके कार्यभार की तुलना में बेहद कम है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि आशा वर्कर गांवों में घर-घर जाकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, परिवार नियोजन, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहे।
ज्ञापन के माध्यम से आशा वर्करों ने पक्का कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम 30 हजार रुपये मासिक वेतन सुनिश्चित करने, सेवानिवृत्ति पर पेंशन और एकमुश्त आर्थिक सहायता देने, बैंक ऋण सुविधा उपलब्ध कराने, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने तथा डेथ क्लेम की राशि बढ़ाने की मांग उठाई। इसके अलावा ड्यूटी के दौरान दुर्घटना की स्थिति में स्वास्थ्य बीमा और उचित मुआवजा देने की भी मांग की गई।
यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 21 जुलाई को प्रदेशभर की आशा वर्कर जिला एनएचएम कार्यालयों पर पहुंचकर रोष प्रदर्शन करेंगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार और विभाग जिम्मेदार होंगे।