चंडीगढ़। हरियाणा के गृह सचिव राजीव अरोड़ा और गृह मंत्री अनिल विज के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। मंत्री अनिल विज ने इस मामले में मुख्य सचिव विजय वर्धन और गृह सचिव राजीव अरोड़ा को पत्र लिखकर पूछा है कि कोविड के दौरान गठित टास्क फोर्स की जानकारी उन्हें क्यों नहीं दी गई। विभाग के मंत्री होने के नाते उन्हें यह पता होना चाहिए था कि विभाग में क्या चल रहा है।
केंद्रीय नेेतृत्व को भी विज ने इस बावत अवगत करवाया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ दिल्ली में हुई मुलाकात में विज ने हरियाणा में चल रहे घटनाक्रम से भी अवगत करवाया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नड्डा से हुई बातचीत में विज ने अवगत करवाया कि सरकार में किस तरह से उनकी अनदेखी हो रही है। मंत्रियाें को भी फैसले से पहले पूछा नहीं जाता है। उन्होंने बताया कि एसीएस स्तर पर फैसला लेकर उसको अमलीजामा पहना दिया गया, लेकिन विभाग के मंत्री को इसकी जानकारी नहीं दी गई।
इसके अलावा गृह विभाग और स्वास्थ्य विभाग दोनों राजीव अरोड़ा के पास है। विज ने इस बात का मुददा बना दिया है कि दोनों विभागाें का काम एक अधिकारी नहीं संभाल सकता क्योंकि दोनों एक ही विभाग हैं। काम प्रभावित हो रहा है, गृह विभाग में हजारों अपील लंबित पड़ी हैं। जनता के सामने जवाबदेही मंत्री की होती है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता की रिपोर्ट का मुद्दा भी क्रेंदीय नेतृत्व के सामने रखा और बताया कि कोविड के दौरान ज्ञान चंद गुप्ता ने अस्पतालों की पैसा वसूली की शिकायत की। मामले की जांच हुई लेकिन रिपोर्ट अभी तक मंत्री के पास नहीं पहुंची है। इस मामले में कमेटी भी गठित हो चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
टास्क फोर्स के मामले में विज ने जताई थी नाराजगी
मालूम हो कि टास्क फोर्स के मामले में विज राजीव अरोड़ा को व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी नाराजगी जता चुके हैं। उन्हाेंने व्हाट्सएप पर अरोड़ा को संदेश भेजा कि टास्क फोर्स की जानकारी उन्हें क्यों नहीं दी गई। जिसके जवाब में अरोड़ा ने उन्हें संदेश दिया कि मेरी ऐसी मंशा नहीं थी, लेकिन आगे से मेरी तरफ से आपको कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।