चंडीगढ़। पंजाब में 4 दिसंबर को जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव के नॉमिनेशन के दौरान हुई कथित हिंसा और अफरा-तफरी का मामला अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने शुक्रवार को हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और नॉमिनेशन पेपर भरने के दौरान हुई घटनाओं में दखल देने की मांग की है।
बाजवा ने नॉमिनेशन प्रोसेस के दौरान कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ हिंसा, पावर का गलत इस्तेमाल और भेदभाव का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक निवेदन स्वीकार कर लिया है और केस अब सोमवार को केस सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है। अपने वकील अर्शप्रीत खडियाल के जरिये दायर याचिका में बाजवा ने हाईकोर्ट से उन उम्मीदवारों के लिए नॉमिनेशन की डेडलाइन बढ़ाने की मांग की है जो कथित हिंसा और रुकावटों के कारण अपने पेपर जमा नहीं कर पाए थे।
याचिका में उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की है जिन्होंने कथित तौर पर आम आदमी पार्टी सरकार के निर्देशों पर काम किया। पुलिस अधिकारी या तो हिंसा को कंट्रोल करने में नाकाम रहे या भेदभाव दिखाया। बाजवा ने पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन पर अधिकार का गलत इस्तेमाल करके लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। आजाद और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए बाजवा ने पूरे चुनावी प्रोसेस पर नजर रखने के लिए एक स्वतंत्र ऑब्जर्वर नियुक्त करने की मांग की है।