चंडीगढ़। आईपीएस कैडर के पदों पर पीपीएस अधिकारियों की नियुक्ति, आपराधिक मामले लंबित होने के बावजूद महत्वपूर्ण पदों पर तैनातगी सहित पंजाब पुलिस में सुधारों और व्यवस्था में व्याप्त कमियों को दूर करने के मुद्दे को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
जालंधर निवासी सिमरनजीत सिंह ने याचिका में कहा कि पंजाब में आईपीएस कैडर नियमों का उल्लंघन हो रहा है। पंजाब सरकार की ओर से आईपीएस कैडर के पदों पर पीपीएस अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है। याचिका में एसएसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर पीपीएस अधिकारियों की नियुक्ति के कई उदाहरण दिए गए हैं, जिनमें दलजिंदर सिंह ढिल्लों (एसएसपी पठानकोट), भूपिंदर सिंह (एसएसपी फिरोजपुर), हरविंदर सिंह विर्क (एसएसपी ग्रामीण जालंधर), गुरमीत सिंह (एसएसपी फाजिल्का), जसदीप सिंह (एसएसपी मोगा) और गगनदीप सिंह (एसएसपी मालेरकोटला) शामिल हैं।
याची ने बताया कि जिन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं या जिनकी सुनवाई लंबित है उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है। वहां उनका सीधा जनता से संपर्क होता है। इन अधिकारियों को जांच अधिकारी या पर्यवेक्षक के रूप में भी नियुक्त किया गया है। याचिका में उदाहरण देकर बताया गया कि एसपी परमपाल सिंह जिनके खिलाफ एक फर्जी स्नातक डिग्री के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज है, उनको महत्वपूर्ण पद पर तैनात किया गया है।
राजिंदर सिंह सोहल को आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बावजूद एसएसपी गुरदासपुर के रूप में तैनात किया गया था। हाईकोर्ट को बताया गया कि झूठे हलफनामे और अदालती अवमानना के मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। एक मामले में कोर्ट ने कहा था कि जब तक पुलिस सुधारों पर बनी समिति अंतिम फैसला नहीं लेती, तब तक नैतिक पतन से जुड़े आपराधिक मामलों में आरोपी या दोषी किसी भी पुलिस अधिकारी को सार्वजनिक संपर्क वाले पद पर नहीं रखा जाएगा।
याचिका में बताया गया कि हाईकोर्ट ने अपने पिछले आदेशों का पालन करने में लापरवाही और दयनीय दृष्टिकोण दिखाने के लिए जालंधर के पुलिस आयुक्त स्वपन शर्मा पर एक लाख, लुधियाना के ग्रामीण के एसएसपी अंकुर गुप्ता पर बीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।