अमेरिकी डॉलर कमाने की चाह में चंडीमंदिर निवासी वीरेंद्र को विदेश के जंगलों में पांच महीने तक दर-दर भटकना पड़ा। पांच माह तक एजेंट उसे 13 देशों में घुमाते रहे। भूखा-प्यासा रहना पड़ा। विरोध किया तो आठ दिन तक बंधक बनाकर रखा। चोरी छिपे अलग-अलग देशों में जाने के लिए तकलीफ भरा सफर तय किया।
वीरेंद्र ट्रंप सरकार की ओर से 13 फरवरी को भेजे गए भारतीयों में शामिल था। वीरेंद्र ने बताया कि अमेरिका जाने के लिए ग्रुप में आठ लोग थे, वह भी टूरिस्ट वीजा के नाम पर विदेश में कमाने के झांसे में फंस गए थे। अमेरिका से हुई वापसी के बाद वीरेंद्र ने रोते हुए आपबीती सुनाई।
पांच माह इन रूट का किया इस्तेमाल
वीरेंद्र ने बताया कि आरोपी अमेरिका भेजने के नाम पर पांच माह अलग-अलग यातायात मार्गों से कई देशों में घुमाते रहे। आरोपियों ने सबसे पहले दुबई भेजा। वहां से फिर बहरीन भेज दिया। इसके बाद तुर्की, ब्राजील, बोलिविया, पेरु, इक्वाडोर, कोलंबिया, पनामा, कोस्टारिका, होंडरस, गोटमाला ले गए थे। इन रास्तों में एजेंटों की तरफ से न तो खाने की व्यवस्था की जाती थी और न ही रहने की व्यवस्था करते थे। इस दौरान घर वालों से पैसा मंगाकर काम चलाना पड़ता था।
मैक्सिको और अमेरिका के बॉर्डर पर छोड़ा
21 जनवरी को गोटमाला से लेकर जाते हुए वहां मिले एजेंटों ने मैक्सिको से जुड़े हुए साउथ अमेरिका के बॉर्डर पर उसे छोड़ दिया। वहां चार दिन जंगल में बिताए। साथ में रह रहे लोगों को कुछ लोग अमेरिका लेकर चले गए। भूख और प्यास से तड़पते हुए चार दिन तक उसी जंगल में बिताए। इसके बाद पांचवें दिन 25 जनवरी को अमेरिका की फोर्स ने उसे पकड़ लिया और जेल में डाल दिया।
13 फरवरी को आया भारत वापस
पीड़ित ने बताया कि 24 दिन जेल में बिताने के बाद 13 फरवरी को अमेरिका की पुलिस ने भारत भेज दिया था। इस तरह अवैध तरीके से भेजे गए कई लोग अमेरिका की जेल में बंद हैं। वहीं ट्रंप सरकार भारत के अलग-अलग कोने से अवैध रूप से जाने वाले लोगों को वापस भेज रही है। उन्हीं ग्रुप के साथ वीरेंद्र को भी भारत भेजा गया। वापस आने के बाद वीरेंद्र ने आरोपी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है।