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मेडिकल कालेजों में कॉमन कॉडर के बाद अब ऑनलाइन ट्रांसफर का मामला अटका

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चंडीगढ़। मेडिकल कालेजों में कॉमन कॉडर के बाद अब ऑनलाइन ट्रांसफर का मामला भी अटक गया है। प्रदेशभर के मेडिकल कालेजों के डाक्टरों और अन्य श्रेणी के कर्मियों के विरोध को देखते हुए अब सरकार ने इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया है। साथ ही स्वास्थ्य शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) हरियाणा ने अपने उन आदेशों को वापस ले लिया है, जिसमें सभी कालेजों से क्लास वन से फोर्थ तक कर्मचारियों के पदों का विवरण मांगा गया था।
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13 अगस्त को स्वास्थ्य शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय हरियाणा की ओर से सभी सरकारी मेडिकल कालेजों को आदेश दिए थे 16 अगस्त को अपने कालेजों में पदों के विवरण का पूरा ब्यौरा लेकर सुबह 10 बजे मुख्यालय में पहुंचें। पत्र जारी होते ही डाक्टर्स और अन्य कर्मचारियों ने इसका विरोध किया। पीजीआई रोहतक में तो सभी श्रेणियों के कर्मचारियों ने एकजुट होकर हड़ताल की चेतावनी दे डाली। अन्य कालेजों में इस फैसले का विरोध किया गया। बढ़ते विरोध को देखते हुए 17 अगस्त को डीएमईआर ने अपने आदेशों को वापस ले लिया।
सभी पदों का मांगा था विवरण
डीएमईआर कार्यालय ने पीजीआईएमएस रोहतक, कल्पना चावला मेडिकल कालेज करनाल, बीपीएस मेडिकल कालेज खानपुर, एसएचकेएम नालहड़ और पंडित दीन दयाल उपाध्याय मेडिकल यूनिवर्सिटी को पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया था सभी संस्थान अपने यहां क्लास वन से फोर्थ तक के सेंक्शन पद, भरे हुए और खाली पदों का पूरा विवरण दें। इसके साथ ही इसमें सर्विस रूल, ग्रुप पोस्ट, पे स्केल, पद रेगुलर है या फिर आउटसोर्सिंग से की भी जानकारी दी जाए। इसी प्रकार, सीनियर रेजिडेंट और डेमोनस्ट्रेटर की नियुक्ति को लेकर एससी और बीसी सीटों का विवरण मांगा था।
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मेडिकल कालेजों में खाली पदों को भरने के लिए कोशिश
दरअसल, प्रदेश सरकार नई भर्ती के बजाय पहले से मौजूद स्टाफ का तबादला कर अलग-अलग मेडिकल कालेजों में खाली पड़े पदों को भरने की कोशिश में है। क्योंकि पीजीआईएमएस रोहतक सबसे पुराना संस्थान है और यहां पर अन्य के कालेजों के मुकाबले स्टाफ अधिक है। सरकार ने हाल ही में फरीदाबाद में एक कालेज को अपने अंतर्गत लिया है, यहां पर भी स्टाफ की कमी है। जबकि हर जिले में मेडिकल कालेज की घोषणा सरकार पहले ही कर चुके है और जिलों में कालेजों का निर्माण चल रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने कॉमन कॉडर के लिए भी प्रस्ताव पास किया था, लेकिन इसका विरोध हुआ था।
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