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Panchkula News: 28 दिन में चार मौतों पर आज होगा एक्शन, डाक्टरों पर गिर सकती है गाज

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तीन प्रसूताओं और एक नवजात की मौत के मामलों में डीजीएचएस की दो घंटे चली बैठक
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सीएमओ-पीएमओ से वीरवार तक मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट
अंबाला, पीजीआई और जिले के अस्पतालों के रिकॉर्ड खंगाले गए
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। जिले में 28 दिनों के भीतर तीन प्रसूताओं और एक नवजात की मौत के मामलों में स्वास्थ्य विभाग अब सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजीएचएस) हरियाणा की अध्यक्षता में बुधवार को करीब दो घंटे चली बैठक में मामलों की समीक्षा की गई। इसके बाद सीएमओ और पीएमओ कार्यालय से वीरवार तक एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) तलब की गई है। जांच में लापरवाही मिलने पर संबंधित डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ने तीनों मामलों की आंतरिक जांच पूरी कर ली है। जांच के दौरान अंबाला, पीजीआई चंडीगढ़ और जिले के स्वास्थ्य संस्थानों के रिकॉर्ड, रेफरल स्लिप, उपचार संबंधी दस्तावेज और ड्यूटी रोस्टर की पड़ताल की गई। शिकायतकर्ता परिवारों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
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हाई रिस्क मामलों पर रहेगी विशेष निगरानी
विभाग ने सभी अस्पतालों में हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की रोजाना मॉनिटरिंग, 108 एंबुलेंस की रियल टाइम ट्रैकिंग और रेफरल सिस्टम को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। मरीजों की शिकायतों के निस्तारण के लिए 24 घंटे की समयसीमा तय की गई है। बिना कारण रेफर करने या इलाज में देरी करने वाले डॉक्टरों व कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पीएचसी और सीएचसी स्तर के कर्मचारियों को इमरजेंसी डिलीवरी और रेफरल प्रोटोकॉल की दोबारा ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

इन मामलों की हो रही जांच
मनदीप कौर मामला: बंगा गांव निवासी मनदीप कौर की डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ने पर पीजीआई रेफर किया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। 10 दिन बाद उनके नवजात की भी मौत हो गई।
रीना देवी मामला: रायपुररानी के भूड़ गांव निवासी रीना देवी की डिलीवरी के 10 दिन बाद तबीयत बिगड़ी और उपचार के दौरान मौत हो गई।
संध्या मामला: बरवाला के भरेली गांव की संध्या हाई रिस्क श्रेणी में होने के बावजूद समय पर भर्ती नहीं हो सकीं। बाद में निजी अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
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रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
पीएमओ डॉ. आरएस चौहान ने कहा कि शिकायत मिलते ही जांच शुरू कर दी गई थी और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सिविल सर्जन डॉ. मुक्ता ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करना विभाग की प्राथमिकता है और लापरवाही पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
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