साक्ष्यों के अभाव में पंजाब निवासी युवक को मिली राहत, सीसीटीवी और वैज्ञानिक प्रमाण भी नहीं कर सके आरोप साबित
जिला अदालत ने कहा- संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। आठ साल पुराने फार्च्यूनर लूट मामले में आरोपी को जिला अदालत से राहत मिल गई। चालक द्वारा कोर्ट में पहचानने से इन्कार करने और पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने पंजाब निवासी विक्रमजीत सिंह उर्फ विक्की को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
जिला अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान और वारदात में उसकी संलिप्तता को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। मामले में सबसे अहम तथ्य यह रहा कि जिस चालक से हथियार के बल पर फार्च्यूनर लूटी गई थी, उसने अदालत में आरोपी को पहचानने से इनकार कर दिया।
मामला छह जनवरी 2018 की रात का है। शिकायतकर्ता रणधीर सिंह सेक्टर-9 निवासी अरुणदीप सिंगला के चालक थे। वह अपने मालिक को सेक्टर-9 स्थित एक प्रतिष्ठान में छोड़कर फार्च्यूनर में बैठे थे। आरोप है कि इसी दौरान दो युवकों ने पिस्तौल के बल पर उन्हें बंधक बना लिया और अन्य साथियों की मदद से वाहन लेकर फरार हो गए। बाद में चालक को जीरकपुर के पास छोड़ दिया गया था।
सह आरोपियों के बयान में आया था नाम
पुलिस जांच के दौरान गिरफ्तार हरमिसरन सिंह उर्फ सिमरन और अजयपाल सिंह ने पूछताछ में विक्रमजीत सिंह का नाम लिया था। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर मामले में शामिल किया। हालांकि, हरमिसरन सिंह को वर्ष 2023 में अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया था, जबकि अजयपाल सिंह की मृत्यु के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त हो गई।
वैज्ञानिक साक्ष्य भी नहीं मिले
सुनवाई के दौरान पुलिस घटनास्थल या आसपास की सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश नहीं कर सकी। वहीं, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, फिंगरप्रिंट, डीएनए या अन्य किसी वैज्ञानिक साक्ष्य से भी विक्रमजीत का वारदात से संबंध साबित नहीं हो सका। अदालत ने यह भी माना कि मामले में कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में केवल संदेह के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त कानूनी साक्ष्य आवश्यक हैं। इन्हीं आधारों पर अदालत ने विक्रमजीत सिंह उर्फ विक्की को सभी आरोपों से बरी कर दिया।