पंचकूला। परिवहन विभाग की पहल पर वेबिनार श्रृंखला में बुधवार को हरियाणा के सभी स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों ने शिरकत की। डॉ. अशोक चौहान प्रोफेसर अर्थशास्त्र विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने कहा कि एक शोध के रिपोर्ट के अनुसार एक व्यक्ति की मृत्यु पर 91 लाख रुपये की क्षति होती है। ऐसे में हरियाणा में करीब प्रतिवर्ष 5 हजार लोगों की मृत्यु से जान की कीमत का अंदाजा लगाया जा सकता है। रिश्तों और भावनाओं का तो कोई मूल्य ही नहीं।
यदि कहीं सड़क बन जाती है, तो उस इलाके की जमीन की कीमत कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने हरियाणा के प्रधान सचिव शत्रुजीत कपूर के नेतृत्व में चल रहे सड़क सुरक्षा अभियानों की प्रशंसा करते कहा कि अब परिवहन विभाग की कार्य संस्कृति पारदर्शी होती जा रही है। इसमें लाइसेंस प्रणाली, चालान भुगतान और वाहन पंजीकरण उल्लेखनीय है। प्रख्यात चित्रकार एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग के प्रोफेसर डॉ. रामविरंजन ने कहा कि जान से महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। दुर्घटना का सबसे बड़ा कारण लापरवाही है। इसलिए जन-जागरण के लिए कलाओं का उपयोग होना चाहिए, क्योंकि जो बात एक चित्र के माध्यम से कही जा सकती है उसे हजार शब्दों से भी अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि समकालीन प्रश्न सड़क दुर्घटना के समाधान में सड़क उपयोगकर्ताओं को सड़क के नियम के प्रति जागरूक करने के लिए कलाएं बड़ी माध्यम बन सकती है। प्रचार साहित्य वॉल पेंटिंग एवं पोस्टर इत्यादि के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को सड़क के नियमों को जन सामान्य तक संबोधित किया जा सकता है। अध्यक्षता करते हुए संयुक्त परिवहन आयुक्त निर्मल नागर ने कहा कि प्रधान सचिव परिवहन शत्रुजीत कपूर की प्रेरणा से परिवहन आयुक्त अमिताभ ढिल्लों के मार्ग दर्शन में संचालित यह वेबिनार श्रृंखला हरियाणा के संदर्भों में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा विमर्श में उभरे विचार विद्यार्थियों के जिज्ञासाओं को यातायात प्रहरी मंच पर प्रकाशित कर हरियाणा के सभी शिक्षण संस्थाओं को उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सितंबर माह हिंदी राज भाषा माह के रूप में मनाया जाता है। इसलिए अभिव्यक्ति के सभी स्वरूपों एवं माध्यमों को सड़क सुरक्षा के लिए समर्पित किए जाने की हम अपील करते है।