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Panchkula News: चीनी मांझे पर रोक के बावजूद हादसे, हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से मांगा जवाब

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब में चीनी मांझे के इस्तेमाल से हो रहे हादसों पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रतिबंध के बावजूद हो रही इन घटनाओं में दो लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
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हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा है कि चीनी मांझे पर लगाए गए प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई है। अदालत ने सरकार को इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारी का विशेष शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता सुभाष कुंद्रा उर्फ कैटी ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि पंजाब सरकार ने चीनी डोर यानी मांझे के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है। हालांकि, यह प्रतिबंध जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो रहा है। इसके कारण बच्चे और आम लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं।
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याचिकाकर्ताओं ने विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित घटनाओं का हवाला दिया। इन रिपोर्टों में चीनी मांझे से जुड़ी घटनाओं में हुई मौतों और घायलों का जिक्र था। याचिका में मुख्य सवाल उठाया गया कि प्रतिबंध के बावजूद ठोस क्रियान्वयन तंत्र क्यों नहीं बनाया गया।


प्रभावी क्रियान्वयन की मांग :

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि केवल अधिसूचना जारी करने से प्रतिबंध प्रभावी नहीं होता है। इसके पालन की निगरानी और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई के लिए स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को मामले की सुनवाई के दौरान विशेष निर्देश दिए। अदालत ने जिम्मेदार अधिकारी से शपथपत्र दाखिल करने को कहा।

सरकार से मांगा स्पष्टीकरण :
शपथपत्र में स्पष्ट रूप से बताना होगा कि चीनी मांझे पर प्रतिबंध लगाने वाली अधिसूचना को प्रभावी तरीके से लागू कराने के लिए कौन सी व्यवस्था तैयार की गई है। इसमें यह भी बताना होगा कि कौन सी कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है। यह कदम चीनी मांझे से होने वाले हादसों को रोकने के लिए उठाया गया है। अदालत ने इस मामले पर गंभीरता से विचार किया है।
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