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आसरेवाली कांड : 1104 पेड़ों की कटाई के बीच हटाई गई चेक पोस्टें

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विभागीय पत्र बना सबसे बड़ा सबूत, सुरक्षा हटते ही तस्करों ने साफ किया जंगल
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। आसरेवाली जंगल में 1104 पेड़ों की अवैध कटाई के बीच चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिस समय तस्कर जंगल उजाड़ रहे थे, उसी दौरान वन विभाग ने लिखित आदेश जारी कर आसरेवाली गांव के बाहर लगी चेक पोस्ट को हटा दिया। विभागीय पत्र संख्या 556 अब इस पूरे मामले में लापरवाही का सबसे बड़ा दस्तावेजी सबूत बनकर सामने आया है।
सुरक्षा हटते ही तस्करों की चांदी
विभागीय पत्र के अनुसार 30 सितंबर 2025 को आसरेवाली चेक पोस्ट को तत्काल प्रभाव से हटाने और वहां तैनात कर्मचारियों की टाइम-वाइज ड्यूटी समाप्त करने के आदेश दिए गए। तर्क दिया गया कि 25 सितंबर को इस क्षेत्र का प्रभार क्षेत्रीय विंग से वन्य प्राणी विंग को सौंप दिया गया था। सवाल है कि क्या प्रभार बदलने के नाम पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह हटाना उचित था? इसी ढील का फायदा उठाकर तस्करों ने 1104 पेड़ों का सफाया कर दिया।
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कैमरे और नाके हटे, बेखौफ हुई कटाई
पहले इस चेक पोस्ट पर सख्त निगरानी रहती थी, जिससे अवैध लकड़ी की आवाजाही लगभग नामुमकिन थी। आदेश संख्या 556 में अस्थायी चेक पोस्ट हटाकर कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्रों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन यह व्यवस्था कागजों तक ही सीमित रही। सीसीटीवी और नाकों की अनुपस्थिति ने तस्करों को जंगल के भीतर तक पहुंचने का खुला रास्ता दे दिया।

जांच के घेरे में ट्रांसफर
अब विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि पेड़ों की कटाई प्रभार हस्तांतरण (25 सितंबर) से पहले हुई या चेक पोस्ट हटने (30 सितंबर) के बाद। यदि कर्मचारी अपने क्षेत्रों में निगरानी कर रहे थे तो इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की जानकारी किसी को क्यों नहीं मिली?
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बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
सरकारी पत्र से यह स्पष्ट हो गया है कि सुरक्षा व्यवस्था हटाई गई थी। अब वन मंडल अधिकारी, मोरनी-पिंजौर को भेजी गई रिपोर्ट के बाद यह देखना होगा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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