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Panchkula News: दूसरी शादी से पैदा हुआ बच्चा भी पेंशन व सेवानिवृत्ति लाभ का हकदार

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों के बंटवारे में बच्चों के अधिकार सुरक्षित हैं, भले ही मामला दूसरी शादी से संबंधित क्यों न हो।
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जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को निर्देश दिए कि दिवंगत कर्मचारी राकेश कुमार की पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ उनकी दूसरी शादी से हुए बच्चों को तीन माह के भीतर जारी की जाएं। यह आदेश अभिषेक दत्ता और उनकी बहन की याचिका पर आया, जिन्होंने पीएसपीसीएल के उस निर्णय को चुनौती दी थी जिसमें निगम ने उनके पिता की पेंशन और ग्रेच्युटी का 50% रोक लिया था।
असिस्टेंट लाइनमैन राकेश कुमार का निधन मई 2013 में हो गया था। निगम ने शेष लाभ इसलिए रोके थे क्योंकि राकेश कुमार की पहली पत्नी मीना के अस्तित्व का हवाला दिया गया था। अदालत ने पाया कि मीना ने राकेश कुमार से अलग होने के बाद दूसरी शादी कर ली थी और दो दशकों से अपने नए पति के साथ रह रही थीं। कर्मचारी अभिलेखों और 2013 के डिपेंडेंसी सर्टिफिकेट में केवल दूसरी पत्नी रजनी, उनके बच्चे और राकेश कुमार की मां को आश्रित के रूप में दर्शाया गया था।
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हाईकोर्ट ने कहा कि बिना किसी दावे या आपत्ति के सिर्फ अनुमान के आधार पर पेंशन लाभ रोकना न्यायसंगत नहीं है। नियमों का यांत्रिक अनुप्रयोग करके योग्य वारिसों को उनका हक न देना न्याय के उद्देश्य को नुकसान पहुंचाता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सेवा नियमों के तहत बहुविवाह (बिगैमी) गंभीर अनुशासनहीनता मानी जाती है, लेकिन दूसरी पत्नी और उससे हुए बच्चों के अधिकार नियमों द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। हक का प्रतिशत (50% या 100%) इस बात पर निर्भर करता है कि पहली पत्नी जीवित है या नहीं।
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