पंचकूला। हुडा की हेकड़ी की वजह से बूथ/शोरूम मालिकोें में काफी रोष है। उनका कहना है कि हुडा की वजह से उन्हें यह दिन देखना पड़ रहा है। लड़ाई सिर्फ ब्याज को लेकर थी लेकिन हुडा बूथ/शोरूम को सील करने पर उतारू हो गया। जब से लड़ाई शुरू हुई है तब से लेकर आज तक सभी मालिक रुपये देने को तैयार हैं। जब उनसे इस बारे में व्यापारी बात करता है तो हुडा उनसे कोर्ट में जाने की अपील करता है। हुडा का कहना है वह उन्हें राहत नहीं दे सकता। इस मामले में कोर्ट ही कोई फैसला ले सकती है।
सेक्टर सात की मार्केट के व्यापारी सीबी गुप्ता को कुछ ऐसी ही परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनका साल 1987 में हुडा से प्लाट अलाट हुआ था। उस समय उन्होंने बूथ की आधे से ज्यादा कीमत भर दी। कुछ दिक्कत आई तो वह किस्त नहीं भर सके। कुछ दिन बाद हुडा की ओर से रुपये देने का नोटिस आया। नोटिस के हिसाब से करीब एक लाख 70 हजार रुपये बकाया बताया गया, जबकि उनके हिसाब से केवल 70 हजार रुपये देने थे। बातचीत चल ही रही थी कि बूथ को रिज्यूम करने का नोटिस भेज दिया गया। उसके बाद से कोर्ट में केस चल रहा है। उनका कहना है साल 2000 में भी वे ब्याज सहित रुपये देने को तैयार थे और अब भी वे रुपये देना चाहते हैं, लेकिन हुडा है कि मानने को तैयार नहीं।
ऐसा नहीं है कि सिर्फ किराएदार व्यापारी को ही परेशानी उठानी पड़ रही है, बल्कि उनके मालिकों को भी काफी दिक्कत हैं। एक तो उनका बूथ जा रहा है, तो दूसरी तरफ किराएदार व्यापारी किराया भी नहीं दे रहे। सेक्टर-सात के व्यापारी जगदीश प्रसाद ने बताया कि साल 1987 में उन्हें बूथ अलॉट हुआ। ब्याज को लेकर विवाद हो गया तो हुडा ने रिज्यूम करने के ऑर्डर पास कर दिए, जबकि तत्कालीन एडमिनिस्ट्रेटर उस दौरान लिखित ऑर्डर दिया था कि जब कोठियों से दुकानें नहीं हटती तब तक उनसे ब्याज नहीं लिया जाएगा। बात ब्याज से बिगड़ी और अब तक बिगड़ी है। दूसरी तरफ किराएदार व्यापारी किराया नहीं दे रहा। बूथ तो गया ही साथ किराया भी मारा गया।
व्यापार मंडल के प्रधान बीबी कोछड़ का कहना है कि इस मामले में सरकार को दखल देकर जल्द से जल्द कोई फैसला लेना चाहिए। इसका सीधा नुकसान व्यापारियों को ही उठाना पड़ रहा है। कारोबार उनका प्रभावित हो रहा है। हुडा को ऐसी नीति लानी चाहिए, जिससे बीच का रास्ता निकले। वरना शहर से व्यापारी उजड़ जाएगा।
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एक व्यापारी का सुझाव
सेक्टर-19 के मार्केट एसोसिएशन के प्रधान नरेश नारंग ने ‘अमर उजाला’ को एसएमएस कर सुझाव दिया है कि हुडा की ओर से व्यापारियों को सहूलियत देनी चाहिए। जब तक मामला नहीं सुलझता है, तब तक हुडा को किरायदार से रुपये वसूलना चाहिए। जब मामला सुलझ जाए तो किराया मकान मालिक को दे देना चाहिए।