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फैक्टरियों में सुरक्षित नहीं हैं कर्मचारी

Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
Panchkula
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डेराबस्सी। लालड़ू के गांव बसौली में स्थित दशमेश मेडिकेयर कंपनी में रियेक्टर फटने के बाद हुए अग्निकांड में चार लोगों की मौत के बाद इलाके में स्थित अन्य केमिकल कंपनियों में लगे हजारों कर्मियों की सुरक्षा प्रबंधों पर सवालिया निशान लग गया है।
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डेराबस्सी एवं लालड़ू क्षेत्र में केमिकल कंपनियों की भरमार है, जिनमें हजारों कर्मचारी कार्य करते हैं। क्षेत्र की हरेक केमिकल में सैंकड़ों रिएक्टर नुमा बम लगे हुए हैं। जिनके फटने पर कंपनियों के पास वहां कार्य कर रहे कर्मियों को बचाने के लिए कोई प्रबंध नहीं है, जिससे यह है कि जब कभी रियेक्टर फटेगा तो वहां कार्य कर रहे कर्मियों के साथ कोई भी अनहोनी हो सकती है।जानकारी के मुताबिक क्षेत्र में दो दर्जन के करीब बड़ी केमिकल कंपनियां हैं, जहां हजारों की गिनती में कर्मी कार्य करते हैं। इनमें इंडो स्विफ्ट लेबोरोटरी लिमिटेड के डेराबस्सी क्षेत्र में तीन प्लांट, पैराबोलिग ड्रगस के डेराबस्सी एवं लालड़ू में एक-एक प्लांट, जीजी केमिकल, सौरव केमिकल, रेनबो डेनिम, पीसीसीपीएल, सूर्या फार्मासिस्ट, ए-सिक्स केमिकल, नैक्टर लाईफ एंड सांइस के डेराबस्सी में दो प्लांट के अलावा कई छोटी बड़ी कंपनिया शामिल हैं। हरेक केमिकल कंपनी में दर्जनों रिएक्टर लगे होते हैं, जिसका इस्तेमाल केमिकल को गर्म कर आपस में प्रोसेस कर दवाईयां बनाने के लिए तैयार किया जाता है।
यह एक निर्धारित तापमान को ही सह सकता है, जिससे अधिक तापमान होने के कारण यह बंब कर तरह फट जाता है। इससे बचने के लिए इस पर सेफ्टी वॉल्व लगे होते हैं, जहां से निर्धारित तापमान से अधिक होने पर अपने आप बाहर निकल जाता है, लेकिन अगर यह सेफ्टी वॉल्व कार्य न करे तो अधिक तापमान सहने पर यह फट जाता है। लालड़ू स्थित दशमेश मेडिकेयर कंपनी में तीस अप्रैल को इसी तरह रियेक्टर फटने के कारण हुए हादसे में चार कर्मियों की मौत हो चुकी है। हालांकि कंपनियों की ओर से इसकी सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पिछले समय से लालड़ू में पिछले दिनों तीन केमिकल कंपनियों में यह फट चुके हैं, जिनमें लालड़ू में चार लोगों की मौत को मिलाकर कुल सात कर्मियों की मौत हो चुकी है, जो कंपनी के प्रबंधकों के सुरक्षा प्रबंधों पर सवालिया निशान लगाती हैं।
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रियेक्टर को फटने से बचाने के लिए समय-समय पर बरती गई सावधानी और जांच ही ऐसे हादसे होने से बचा सकती है।

लेकिन कंपनियों की ओर से यह जांच व सावधानी नाममात्र ही होती है। कंपनियां सावधानी बरतने व इसकी समय-समय पर जांच कराने में कोताही बरतती हैं, जिस कारण यह हादसे घटित होते हैं। हालांकि सरकार की ओर से इनकी जंाच के लिए अलग-अलग विभाग बनाए गए हैं, लेकिन उनकी कार्य प्रणाली भी शक के घेरे में है। जहां कंपनी प्रबंधकों की सांठ-गांठ के साथ इनको पास कर दिया जाता है। विभाग की ओर से कभी भी किसी भी कंपनी के खिलाफ सुरक्षा प्रबंधों में कोताही बरतने के लिए कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, अगर रियेक्टर फट जाए तो यह बंब की तरह तबाही मचा सकता है। इस बारे में डिप्टी कमिशनर वरुण रुजम ने बताया कि विभागों की ओर से समय-समय पर जांच की जाती है। लालड़ू कंपनी में सारे रिकार्ड की जांच की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिया कि लापरवाही बरतने वाले विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कंपनियों में लगे रियेक्टर व अन्य सुरक्षा प्रबंधों को यकीनी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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