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बाबुओं के शहर के भविष्य निधि कार्यालय में अव्यवस्थाओं की भरमार
चक्कर पर चक्कर कटवा रहे भविष्य निधि कार्यालय के अफसर
-पूछताछ काउंटर पर सही से बात नहीं करते कर्मचारी
-हर कोई परेशान, एक बार में पूरी जानकारी नहीं देते
-दूरदराज से आ रहे रिटायर्ड कर्मचारियों को आ रही है परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल को बाबुओं और पढ़े-लिखों का शहर कहा जाता है, लेकिन इस शहर का भविष्य निधि कार्यालय बीमार है। आलम यह है कि जब भी कोई व्यक्ति अपने पीएफ और अन्य जानकारी के लिए ऑफिस में जाता है तो सिर्फ चक्कर ही लगवाए जाते हैं। हम बात कर रहे हैं सेक्टर-17 स्थित भविष्य निधि कार्यालय का। यहां अव्यव्यस्थाओं की भरमार है। खासकर दूरदराज से आने वाले लोगों को कार्यालय की ओर से सही जानकारी नहीं मिलने से उन्हें रोजाना चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे उनकी पीड़ा और बढ़ जाती है। पूछताछ काउंटर में भी लोगों को एक बड़ी समस्या से जूझना पड़ रहा है। काउंटर जमीन से करीब तीन फीट ऊंचाई पर है। वहां तक पहुंचने के लिए अस्थायी स्टैंड बनाया गया है, लेकिन उसकी हालत ऐसी है कि उस पर खड़े होने के बाद कभी भी कोई गिर सकता है। बुजुर्ग और महिलाओं के लिए यह काफी परेशानी भरा है, लेकिन इसकी कोई सुध नहीं लेता।
क्या कहते हैं लोग
कागजात पूरे फिर भी किया जा रहा परेशान
मैं हरियाणा बीज विभाग से रिटायर्ड हूं। मुझे मेरा 35 साल का पीएफ नहीं मिल पा रहा है। पांच बार कार्यालय आ चुका हूं। एक तो यहां पूछताछ काउंटर पर गिरने का खतरा रहता है, दूसरा मुझे बार बार चक्कर कटाए जा रहे हैं। मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं। मैं बहुत परेशान हूं।
-सतपाल कपिल, अंबाला कैंट
सही से बात तक नहीं करते अफसर
चार साल से कार्यालय के चक्कर काट रहा हूं। मालिक और कार्यालय दोनों पर केस करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं निकल रहा है। पूछताछ काउंटर पर सही से बात नहीं करते। इस रवैये से मेरे साथ के कुछ कर्मचारी यहां आना ही छोड़ गए हैं। अंदर भीड़ के कारण सांस लेना मुश्किल है।
-बहादुर सिंह, डेराबस्सी
यहां से वहां कटवा रहे चक्कर
हमारी कंपनी की एक महिला की मौत हो गई थी। उसकी पेंशन बंद कराने के लिए उसके बेटे के साथ यहां आया हूं। लाइन में टोकन के लिए एक घंटा खड़ा रहा। फिर इनका लंच टाइम हो गया। आधे घंटे के लंच टाइम में इन्होंने एक घंटा लगा दिया। उसके बाद यहां से वहां चक्कर कटा रहे हैं।
-विजय राम, मोहाली
पहली बार में नहीं देते पूरी जानकारी
कभी बोलते हैं कि कागजात पूरे नहीं, कभी बोलते जन्मतिथि ठीक नहीं। पहली बार जब कोई आता है उसी समय सारे डॉक्यूमेंट के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। हम लोग दूर से आते हैं। किराया भी काफी लग जाता है। मैं यहां कई बार आ चुकी हूं। हर बार कोई न कोई गलती बता दी जाती है।
-मंजीत कौर, मोहाली
कोट...
लोगों की समस्या का समाधान किया जा रहा है। एक दिन में सभी की समस्या को हल नहीं किया जा सकता है। इस बारे में अलग-अलग अधिकारियों से कहा गया है कि वे लोगों की समस्या का समाधान जल्द करें।
-सुखबीर सिंह भाटी, कमिश्नर द्वितीय