चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कीवी की बड़ी खेप को अनावश्यक और अवैध रूप से रोकने पर कस्टम विभाग को फटकार लगाते हुए आयातक को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। 89,420 किलोग्राम कीवी कस्टम विभाग की ढिलाई और लालफीताशाही के चलते नष्ट हो गई।
लुधियाना की एमएस प्रेंडा क्रिएशंस प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कीवी रिलीज करने का निर्देश देने की मांग की थी। कीवी की डिलीवरी 16 अप्रैल, 2023 को होनी थी, लेकिन कस्टम अधिकारियों ने इसे रोक दिया क्योंकि उनके अनुसार बिल ऑफ एंट्री उपलब्ध नहीं था।
इसके बाद कोर्ट के हस्तक्षेप पर 1 अगस्त, 2023 को फलों को रिलीज किया गया, लेकिन तब तक पूरी खेप खराब हो चुकी थी और इंसान के खाने लायक नहीं रही। कोर्ट ने यह भी पाया कि आयातक को अपने ग्राहकों को फल नहीं पहुंचा पाने के कारण व्यवसायिक क्षति और प्रतिष्ठा की हानि हुई।
कोर्ट ने इस मामले को लालफीताशाही का उदाहरण बताते हुए संबंधित अधिकारियों पर सवाल उठाए और केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए नीति बनाने को कहा कि भविष्य में लैब, शिपिंग कंपनियां और कस्टम विभाग आपस में तालमेल से काम करें ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। कोर्ट का स्पष्ट मत था कि ऐसे मामलों में विभाग की देरी ही वजह है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजय वशिष्ठ की खंडपीठ ने साथ ही कस्टम ड्यूटी 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से वापसी का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह राशि उन अधिकारियों से वसूली जाए, जिनकी लापरवाही के कारण यह नुकसान हुआ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाले फल मिलना उनका अधिकार है। अगर सरकार के विभाग ऐसे ही व्यवहार करते रहे तो आयातक सड़े-गले फल ही बाजार में लाएंगे और इसका नुकसान आम जनता को होगा।