चंडीगढ़। पंजाब में किसानों पर 75 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। यह खुलासा कृषि मंत्री कुलदीप धालीवाल ने किया। उन्होंने बंगलुरू में सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों की राष्ट्रीय कांफ्रेंस में किसानों को कर्ज से उबारने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर से बड़े आर्थिक पैकेज की मांग की है। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान, इराक और मध्य पूर्व तक कृषि और बागबानी उत्पादों का व्यापार खोलने की वकालत भी की।
पंजाब के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को निजी तौर पर मिलकर पत्र सौंपते हुए कहा कि पंजाब का छोटा किसान इस समय में कर्ज के जाल में फंसा हुआ है। राज्य के किसानों पर 75 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है जहां पाकिस्तान हमेशा राज्य की बड़ी किसान आबादी की कमजोरियों की खोज में रहता है, ताकि नशे और आतंकवाद को बढ़ावा देकर इसको और कमजोर किया जा सके। इस वजह से राज्य को कर्ज माफी फंड दिया जाए।
इसके अलावा कृषि मंत्री ने मध्य पूर्व तक कृषि और बागबानी उत्पादों का व्यापार खोलने की मांग की, जिससे राज्य का किसान खुशहाल हो सके। कृषि मंत्री ने कहा है कि पंजाब ने चार दशकों में अन्न के भंडार में देश को गेहूं और चावल का अनाज दिए हैं। इस प्रक्रिया में 1000 साल से बनी मिट्टी से पौष्टिक तत्व खत्म हो गए हैं और भूजल खतरनाक स्तर तक गिर चुका है। राज्य के पास 15 से 20 साल में निकालने के लिए पानी नहीं होगा। भारत सरकार को एक नैतिक कर्तव्य के रूप में राज्य के किसानों को अगले दशक में फसलीय विभिन्नता, पानी का संरक्षण और उच्च मूल्य वाली फसलों, जैसे कपास, दालें, फल, सब्जियां, गन्ना, तेल के बीजों में विभिन्नता लाने में मदद करने के लिए एक उपयुक्त फंड स्थापित करना चाहिए। इसमें दो भाग होने चाहिए। एक किसान को धान-गेहूं के चक्र से बाहर निकालने के लिए और दूसरा पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी में अनुसंधान के मानक को ऊंचा उठाने के लिए जरूरी है।
कृषि मंत्री ने सरहद के साथ लगती कंटीली तार के पार 150 फुट चौड़ी 425 किलोमीटर लंबी बेट में 14000 एकड़ वाले किसानों को उन पर लगाई गईं प्रतिकूल शर्तों के अनुसार मुआवजा की मांग की। उन्होंने कहा कि किसान सुबह 10 से शाम 4 बजे तक काम कर सकते हैं और तीन फुट से ऊंची फसलों की पैदावार नहीं कर सकते, इसलिए उनको 15000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष का मुआवजा दिया जाए।
धान के लिए मांगे 1125 करोड़ रुपये
पंजाब के कृषि मंत्री ने कहा कि किसान की धान की पराली को जलाना आदत की अपेक्षा मजबूरी अधिक है, जिस कारण किसान को 2500 रुपये प्रति एकड़ दिए जाने की जरूरत है, जिससे वह पराली को मशीनी तौर पर कृषि यंत्रों के साथ मिला सकें। धान के अधीन 75 लाख एकड़ के लिए भारत सरकार को 1125 करोड़ रुपये सालाना राज्य को दिए जाएं।
कोल्ड चेन के लिए 1000 की जरूरत
फलों और सब्जियों की कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को गोदामों और ट्रकों, वाहनों की एक कोल्ड चेन की जरूरत होती है। 1000 करोड़ रुपये की सहायता राज्य की फसलीय विभिन्नता में लंबा सफर तय करने के लिए अपेक्षित होगा।
शुद्ध खेती के लिए 300 करोड़ की मांग
इसी तरह शुद्ध खेती, ग्रीन हाउस में, वर्टिकल एग्रीकल्चर और हाईड्रोपोनिक्स अब इजराइल और अन्य विकसित देशों में व्यापक तौर पर अपनाए जाते हैं, जो छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं। अगले दशक में हर साल कम से कम 300 करोड़ रुपये बदलाव लाने में मददगार साबित होंगे।