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दो घंटे लगातार बैठने के बाद दस मिनट घूमे, कम होगा बीमारियों का खतरा

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दो घंटे लगातार बैठने के बाद दस मिनट घूमें, बीमारियां होंगी कम
पीजीआई के डाक्टरों के मुताबिक लगातार बैठने का मतलब स्मोकिंग करने के बराबर है
पीजीआई में आज से सात मार्च तक विशेष कांफ्रेंस होगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आजकल सिटिंग जॉब बढ़ गया है। घंटों लोग कुर्सी पर बैठे रहते हैं। इससे कई बीमारियों का रिस्क बढ़ता है। डायबिटीज, मोटापा और हाइपरटेंशन का रिस्क फ्रैक्टर बढ़ा है। ऐसे में क्या करें कि रिस्क फ्रैक्टर भी कम हो और आफिस का काम चल जाए। इस पर पीजीआई के एंडोक्रिनोलाजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संजय बडाडा ने कहा कि दो घंटे लगातार कुर्सी पर बैठने के बाद कम से कम दस मिनट वॉक जरूर करें। इससे मसल्स मजबूत होंगी और मेटाबोलिक सिस्टम भी दुरुस्त होगा। यह बार-बार करने से ब्लड प्रेशर, इंसुलिन रजिस्टेंस, पीठ में दर्द जैसी समस्याएं भी दूर रहेंगी। डा. बडाडा पीजीआई के स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने एक स्लोगन का जिक्र करते हुए बताया कि दो घंटे लगातार बैठने का मतलब कि आप स्मोकिंग कर रहे हैं। यानी कि जो खतरे स्मोकिंग में रहते हैं वही जोखिम लगातार बैठने से होता है। इसलिए वक्त निकालकर जरूर टहलें।
पीजीआई में दो से सात मार्च तक पांचवें पीजीआई एम्स इंटरनेशनल कोर्स ऑन पब्लिक हेल्थ अप्रोचेस टू नॉन कम्युनिकेबिल डिजीज (एनसीडी) का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश विदेश से जाने-माने कई विशेषज्ञ पहुंच रहे हैं। स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ के पीजीआई प्रोफेसर जेएस ठाकुर ने बताया कि छह दिन एनसीडी से संबंधित विषयों पर विस्तार से चरचा की जाएगी, जिसमें एनसीडी की बीमारियों का बोझ, रिसर्च, इलाज, रोकथाम, नेशनल प्रोग्राम जैसे विषयों को शामिल किया गया है। इस दौरान चार मार्च को एक वाकॉथन का आयोजन किया जाएगा। जो सुबह छह बजे पीजीआई से सुखना लेक तक आयोजित होगी। डाक्टर सुखना लेक पर जनता से सीधे संवाद करेंगे। इस मौके पर डा. राकेश कपूर ने बताया कि कैंसर को रोकने के लिए लोगों को अपनी डाइट अच्छी करनी होगी और रोजाना एक्सरसाइज भी करनी होगी।
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उन्होंने बताया कि कैंसर एक फैमिली बीमारी है। यदि किसी को बीमारी हो जाए तो उसके इलाज में काफी खर्च आता है और उसकी देखरेख के लिए एक व्यक्ति की ड्यूटी लग जाती है। यदि दोनों ही कमाने वाले व्यक्ति है तो समझा जा सकता है कि परिवार पर आर्थिक बोझ कितना बढ़ता है। पीजीआई में अधिकतर केस तीसरे और चौथे स्टेज पर आते हैं। यदि लोगों में जागरूकता बढ़े तो पहली स्टेज पर कई केस आ सकते हैं और उन्हें बचाया जा सकता है।
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