लोगों का आरोप - अधिकारियों ने जनता की राय दरकिनार की, छोटे वाहन नाकाफी साबित
संवाद न्यूज़ एजेंसी
मोरनी। हरियाणा सरकार ने मोरनी क्षेत्र में मिनी बसें भेज दी हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि ये बसें इलाके की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं। मोरनी के लिए 42 सीटर बसों की मांग की गई थी, जबकि परिवहन निगम ने 32 सीटर मिनी बसें भेज दीं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने जनता की राय लेने के बावजूद उस पर अमल नहीं किया।
मिनी बसें नहीं कर रही काम
स्थानीय लोगों के अनुसार मोरनी में पिछले लगभग 15 वर्षों से मिनी बसें चल रही हैं, लेकिन इनकी सीटिंग कैपेसिटी, इंजन और बॉडी पहाड़ी और जंगल वाले मार्गों के लिए पर्याप्त नहीं है। 42 सीटर बस में बड़ी बस जैसी मजबूत बॉडी और क्षमता होती है, जो हिमाचल प्रदेश में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।
इसके विपरीत, मोरनी की मिनी बसें यात्रियों की संख्या के हिसाब से नाकाफी साबित हो रही हैं और अक्सर खराब होकर जंगलों में खड़ी हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों की नाराजगी और मांग
टिक्कर ताल निवासी जगदीप शर्मा ने बताया कि यह इलाका पर्यटन और ग्रामीण आबादी दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। कम सीटों वाली बसें कारगर नहीं हैं। 42 सीटर बस ही सही समाधान है। संदीप शर्मा ने कहा कि जनता की मांग साफ है। अगर बड़ी बस जैसी 42 सीटर बसें लाई जाएं तो अधिक सवारियां भी आ सकेंगी और बार-बार खराब होने की समस्या खत्म होगी। दुनी चंद और कृष्ण शर्मा ने भी यही दोहराया कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और यात्रियों की संख्या के अनुसार 42 सीटर बसें ही उपयुक्त हैं।