कुरुक्षेत्र के गांव करानी निवासी सतीश कुमार साल 2020 में तीन परिवारों की उम्मीदों को रंग दे गए हैं। 31 दिसंबर की रात को जब वह अपने टू व्हीलर से जा रहे थे, तभी अचानक सामने से आए कुत्ते को बचाने के चक्कर में उनका एक्सीडेंट हो गया। इससे उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं। उन्हें पीजीआई में दाखिल कराया गया, जहां तीन दिन संघर्ष के बाद उनके शरीर ने कोई रिस्पांस नहीं दिया।
उम्मीद की कोई किरण नहीं दिखाई देने पर पीजीआई के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने सतीश के परिजनों से संपर्क कर आर्गन डोनेट करने की बात रखी। पीजीआई के प्रस्ताव को परिजनों ने स्वीकार कर उन्हें सतीश के आर्गन दूसरे मरीजों में ट्रांसप्लांट की अनुमति दे दी।
पीजीआई की टीम ने 35 वर्षीय सतीश के आर्गन को चेक किया तो दोनों किडनी, पेनक्रियाज, लिवर और दोनों कार्निया ठीक पाईं। पीजीआई की टीम ने इन अंगों को निकाला और कार्निया छोड़कर बाकी अंगों को जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट कर दिया। नए साल पर यह पीजीआई का दूसरा आर्गन डोनेशन है। सतीश कुमार के पिता फूल सिंह का कहना है कि उनका बेटा बहुत जल्दी छोड़कर जा चुका है। जवान बेटे का जाना बहुत बड़ा दुख होता है। वह मेरी बहुत देखभाल करता था।
बस इस बात का गर्व है कि वह इस दुनिया से जाते-जाते लोगों को नया जीवन दे गया है। सतीश की कार्निया संभालकर रख दी गई हैं। मैचिंग मरीज मिलने पर कार्निया को भी ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। पीजीआई रोटो के नोडल आफिसर विपिन कौशल ने कहा कि परिवार ने मुश्किल वक्त पर बड़ा फैसला लिया है। यह फैसला न सिर्फ मिथ्य को खत्म करने वाला है बल्कि समाज को नई दिशा भी देने वाला है।