चंडीगढ़ पीजीआई में करीब 100 गाड़ियों की पार्किंग का इंतजाम हो गया है। हालांकि, यह कोशिश ऊंट के मुंह में जीरा है। क्योंकि पीजीआई में वाहन पार्किंग की बहुत किल्लत है। मरीज के परिजनों को वाहन पार्किंग के लिए जगह नहीं मिलती। आए दिन पार्किंग को लेकर कार चालक व सिक्योरिटी गार्ड के बीच बहस होती रहती है। नई पार्किंग नेहरू एक्सटेंशन ब्लॉक के पास बनाई गई है।
यहां पर करीब 100 चार पहिया वाहन खड़े हो सकते हैं। नेहरू एक्सटेंशन में 334 बेड बनाए गए हैं। इसमें प्राइवेट भी हैं और जनरल वार्ड। इसमें हीप्टोलॉजी, ईएनटी, रेडियोथैरेपी व एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट शिफ्ट किए गए। यहां पर अभी तीन डिपार्टमेंट शिफ्ट हो चुके हैं। मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। ऐसे में मरीजों के परिजनों को पार्किंग में दिक्कत आने लगी है।
अधिकारियों के मुताबिक पीजीआई में रोजाना औसतन 13 हजार कारें, दस हजार स्कूटर, 1500 आटो रिक्शा और 300 रिक्शा आते हैं। जबकि पीजीआई में मात्र 3500 कारें और 20 हजार स्कूटर की जगह है। करीब पांच से छह हजार वाहन सुबह दस से शाम पांच बजे तक खड़े रहते हैं। सवाल यह है कि क्या 100 कारों के लिए बनाई गई जगह मुनासिब है।
हालांकि, बताया गया है कि यह पार्किंग स्पेस सिर्फ डाक्टर व स्टाफ के लिए होगा। क्योंकि इतने तो सिर्फ डॉक्टर व स्टाफ के कर्मचारी हैं। पीजीआई के डायरेक्टर प्रो. जगतराम का कहना है कि पीजीआई में पार्किंग के लिए काफी दिक्कत है, लेकिन इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। करीब 700 से ज्यादा वाहनों पार्किंग के लिए प्लानिंग तैयार की जा रही है। यह पार्किंग स्पॉट भी एक्सटेंशन ब्लॉक के पास होगा। हालांकि, ओरल हेल्थ साइंस के पास 300 से ज्यादा वाहन पार्किंग के लिए जगह तैयार की जा रही है।
चार महीने में तैयार नेहरू हॉस्पिटल से जुड़ेगा एक्सटेंशन
नेहरू हास्पिटल से नेहरू एक्सटेंशन को जोड़ने का काम शुरू हो गया है। इन दोनों को जोड़ने वाले कॉरिडोर को तैयार होने में करीब चार महीने का समय लगेगा। तीन करोड़ के इस प्रोजेक्ट से मरीजों की सुविधा बढ़ जाएगी। पीजीआई के अधिकारियों ने नेहरू अस्पताल और इसके विस्तार ब्लॉक के बीच कॉरिडोर के निर्माण के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को मंजूरी दी थी। कॉरिडोर न बने होने के कारण मरीजों को एंबुलेंस की मदद से लाया जाता है।