पिंजौर थाना पुलिस, एनडीआरएफ और ग्रामीणों ने संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी को सुरक्षित निकाला
बैरिकेड और चेतावनी बोर्ड नहीं होने से उठे सवाल, पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
माई सिटी रिपोर्टर/संवाद
पंचकूला/पिंजौर। हिमाचल के पहाड़ों पर लगातार बारिश के बीच शनिवार शाम पिंजौर की कौशल्या नदी में अचानक पानी बढ़ने से 20 से 25 श्रद्धालुओं की जान पर बन आई। शिवलोतरी और जयंती माता मंदिर में दर्शन के बाद लौट रहे दिल्ली और चंडीगढ़ के एक ही परिवार के श्रद्धालु नदी के बीच तेज बहाव में फंस गए। महिलाओं और बच्चों समेत कई लोग पानी के बीच फंस गए, जबकि टेंपो ट्रैवलर भी नदी में अटक गया। चीख-पुकार के बीच पिंजौर थाना पुलिस, एनडीआरएफ और ग्रामीणों ने संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
घटना शाम करीब छह बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार परिवार के सदस्य मंदिर में दर्शन के लिए नदी के रास्ते गए थे। लौटते समय अचानक पहाड़ी क्षेत्र से पानी का बहाव बढ़ गया। देखते ही देखते नदी की धारा तेज हो गई और श्रद्धालु रास्ते में फंस गए। कुछ लोग किसी तरह किनारे पहुंचे, जबकि कई लोग बीच नदी में ही फंस गए।
रस्सियों के सहारे बच्चों और महिलाओं को निकाला
किनारे पहुंचे लोगों ने तुरंत पिंजौर थाना पुलिस को सूचना दी। थाना प्रभारी राजेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ईआरवी-526 और एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मी रस्सियां लेकर नदी में उतरे और रेस्क्यू शुरू किया। बच्चों और महिलाओं को प्राथमिकता से सुरक्षित बाहर निकाला गया। उन्हें गांव दमदमा की तरफ से सुरक्षित रास्ते से ऊपर पहुंचाया गया। इसके बाद नदी में फंसे अन्य लोगों को भी सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। स्थानीय ग्रामीणों और मौके पर मौजूद श्रमिकों ने भी पुलिस का साथ दिया।
एनडीआरएफ ने संभाला मोर्चा
हालात की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ को सूचना दी गई। टीम के पहुंचने के बाद तेज बहाव के बीच फंसे लोगों को निकालने का अभियान तेज किया गया। पुलिस, एनडीआरएफ और ग्रामीणों की संयुक्त कोशिशों से सभी 20 से 25 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया गया। पुलिस के अनुसार सभी एक ही परिवार के सदस्य थे। इनमें कुछ दिल्ली और कुछ चंडीगढ़ से आए थे।
नदी के रास्ते मंदिर तक कैसे पहुंचा परिवार?
हादसा टलने के बाद प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान कौशल्या नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने का खतरा बना रहता है। ऐसे में नदी के रास्ते श्रद्धालुओं की आवाजाही रोकने के लिए क्या इंतजाम हैं? क्या मौके पर बैरिकेड और चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं? बरसात के दौरान रास्ते की निगरानी और आवाजाही रोकने की कोई व्यवस्था है तो दिल्ली और चंडीगढ़ से आया पूरा परिवार नदी पार कर मंदिर तक कैसे पहुंच गया?
पहले भी फंसते रहे हैं लोग
कौशल्या नदी और पिंजौर के पहाड़ी क्षेत्र में बरसात के दौरान लोगों के नदी में फंसने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। पहाड़ों में बारिश होने के बाद कुछ ही मिनटों में नदी का बहाव खतरनाक हो सकता है। इसके बावजूद शनिवार को श्रद्धालु नदी के रास्ते मंदिर तक पहुंच गए। घटना ने एक बार फिर प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगली बार देर पड़ सकती है भारी
शनिवार को पुलिस, एनडीआरएफ और ग्रामीणों की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन केवल हादसे के बाद रेस्क्यू पर्याप्त नहीं है। नदी के रास्ते स्थायी बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, निगरानी और बरसात के दौरान आवाजाही पर सख्ती जरूरी है। 20 से 25 लोगों को तेज बहाव के बीच फंसने की नौबत ही न आए, इसके लिए प्रशासन को पहले से सुरक्षा इंतजाम करने होंगे। वरना अगली बार पानी की रफ्तार ज्यादा हुई तो रेस्क्यू का मौका भी नहीं मिल सकता।