चंडीगढ़। हरियाणा में दिल्ली सीमा पर महीनों से चल रहे किसान आंदोलन के कारण 2400 उद्योग प्रभावित हैं। उद्यमियों को रोजाना करोड़ों की चपत लग रही है, जिससे आर्थिक तौर पर उनकी कमर टूटने लगी है। उद्यमियों ने सरकार व किसान संगठनों से आंदोलन स्थल बदलने की मांग की है।
इस संबंध में किसान नेताओं से उद्यमी मुलाकात भी कर चुके हैं। कुंडली बॉर्डर पर आंदोलन से सोनीपत के 1700 और बहादुरगढ़ बॉर्डर पर धरने से क्षेत्र के 700 उद्योग बुरी तरह प्रभावित हैं। इनमें उत्पादन ठप है। पहले से तैयार माल उद्यमी नहीं भेज पा रहे, न ही कच्चा माल ला पा रहे हैं। राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित गुप्ता और कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने बताया कि बॉर्डर क्षेत्र के उद्योगों की वर्तमान हालत पर कोई चिंतन नहीं कर रहा। किसान आंदोलन के कारण छोटा उद्यमी कहीं का नहीं रहा। सरकार व किसानों को आंदोलन का स्थान परिवर्तन करना चाहिए ताकि उद्योग चल सकें। किसानों को दिल्ली में जंतर-मंतर, रामलीला मैदान या कहीं अन्य जगह अपना आंदोलन चलाना चाहिए। 2400 उद्योगों में उत्पादन न होने से कर्मचारी घर बैठे हैं। उद्यमियों को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है।
संगठन के हरियाणा अध्यक्ष गुलशन डंग ने बताया कि वे किसानों के साथ हैं, उनकी आशंकाओं को समझ रहे हैं। किसान भी उद्यमियों के बारे में सोचें, चूंकि एक उद्योग से अनेक घर चल रहे हैं। यहां तो हजारों उद्योग किसान आंदोलन के कारण नहीं चल रहे। उद्यमियों का प्रतिनिधिमंडल जल्दी संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को रखेगा, उनसे दिल्ली में एक तय स्थान पर आंदोलन करने का आग्रह किया जाएगा। सरकार सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमियों की मदद के लिए आगे आए।