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उपभोक्ता आयोग-करंट से कटा हाथ

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करेंट से कटा हाथ, बिजली विभाग को देने होंगे पांच लाख
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बहलाना निवासी संजीव कुमार की शिकायत पर उपभोक्ता आयोग का फैसला
नीरज कुमार
चंडीगढ़। घरों के ऊपर या सामने से गुजरनी वाली हाइटेंशन लाइनें हर वक्त एक बड़ा खतरा हैं। इन्हें हटाने की जिम्मेदारी चंडीगढ़ प्रशासन और बिजली डिपार्टमेंट की है। समय रहते दोनों विभाग के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और इस लापरवाही का खामियाजा एक शख्स को उठाना पड़ा है। गांव बहलाना निवासी व शिकायतकर्ता संजीव कुमार ने बताया कि 20 जुलाई, 2016 को वे अपने दोस्त के घर पर थे। उसकी बालकनी के सामने से एक हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी। संजीव के मुताबिक वे इसकी चपेट में आ गए और बेहोश होकर नीचे गिर गए। पहले उन्हें मेडिकल कालेज में दाखिल कराया गया, बाद में पीजीआई रेफर कर दिया। काफी गंभीर होने के कारण जान का खतरा ज्यादा था। पीजीआई ने जान बचाने के लिए उनका बांया हाथ काट दिया।
संजीव ने कहा कि यह लापरवाही बिजली विभाग की थी। इलाके के लोगों ने शिकायत की, लेकिन विभाग ने गंभीरता से नहीं लिया। वे इस मामले को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम में लेकर गए। उनकी शिकायत और बिजली विभाग की दलीलें सुनने के बाद फोरम ने अपना फैसला संजीव के पक्ष में सुनाया। उन्होंने बिजली विभाग को आदेश देते हुए कहा कि वे शिकायतकर्ता को पांच लाख रुपये दे। इसमें मेडिकल खर्च भी शामिल है। इसके अतिरिक्त दस हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के निर्देश दिए। एक महीने के भीतर मुआवजा देना होगा। यदि समय पर नहीं दिया तो 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से अदा करना होगा।
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बिजली विभाग उपभोक्ता फोरम के फैसले के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में अपील दी। उपभोक्ता आयोग ने दोबारा से बिजली विभाग की अपीलें सुनीं। उसके बाद उन्होंने फोरम का फैसला बरकरार रखा और बिजली विभाग की दलीलें खारिज कर दीं। बिजली विभाग ने आयोग को बताया कि उनके पास आटोमैटिक ट्रीपिंग सिस्टम है। यदि ऐसा कुछ होता तो उनके रिकार्ड में जरूर आता। मगर ऐसा हुआ नहीं है और इसमें उनकी कोई कोताही नहीं है। इन दलीलों से आयोग संतुष्ट नहीं हुआ और कड़ी टिप्पणी दी।
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आयोग ने कहा कि प्रशासन और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों को सुरक्षा दें। हाईटेंशन केबल को हटाने की जिम्मेवारी चंडीगढ़ प्रशासन और बिजली विभाग की है। स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया। प्रशासन के चीफ इंजीनियर ने भी इस मामले में अनदेखी की है।
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