चंडीगढ़ । शहरों में 20 साल पुराने दुकान, मकान कब्जाधारकों को संपत्तियों पर मालिकाना हक मिलेगा। शहरी निकायों में मौजूद इन संपत्तियों के विवादों का निपटारा करने के लिए सरकार योजना ला रही है, जिसे वीरवार को मंत्रिमंडल बैठक में मंजूरी दे दी गई। यह नीति ‘नगर निकायों द्वारा दुकानों, मकानों की बिक्री नीति’ कहलाएगी। इसे सरकार के अधिसूचना जारी करने की तिथि से लागू माना जाएगा।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बताया कि योजना के तहत कब्जाधारक दुकान, मकान खरीद सकेंगे। मालिकाना हक न लेने वाले कब्जाधारकों को सरकार की संशोधित नीति अनुसार बढ़ा हुआ किराया देना होगा। अभी इन संपत्तियों का स्वामित्व नगर निकायों की बजाय अन्य संस्थाओं, व्यक्तियों के पास 20 वर्ष या इससे अधिक समय से है। नगर निकायों को ऐसी परिसंपत्तियों के प्रबंधन में कठिनाई आ रही है। अनेक मामलों में ऐसी परिसंपत्तियों का स्वामित्व, कब्जा अनेक बार परिवर्तित हो चुका है। निकायों के पास संबंधित प्रमाणित दस्तावेजों का भी अभाव है। यहां तक कि नगर निकाय बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियों से किराया वसूलने में भी असमर्थ हैं। मंत्रिमंडल ने गहन विचार के बाद यह निर्णय लिया कि ऐसी परिसंपत्तियों का स्वामित्व ऐसे लोगों को ही हस्तांतरित कर दिया जाए, जिनके पास वर्तमान में न्यायोचित कब्जा है। यह नीति न केवल नगर निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि छोटे दुकानदारों और अन्य पट्टेदारों को संपत्तियों के स्वामित्व का अधिकार भी देगी।
ऐसे मिलेगा मालिकाना हक
-एकल कब्जाधारक को मंजिलों की संख्या अधिक होने के बावजूद कलेक्टर रेट अनुसार कीमत चुकानी होगी। जहां दो मंजिल हैं और प्रत्येक मंजिल को अलग-अलग कब्जाधारक को स्थानांतरित किया जाना है, वहां भूतल के कब्जाधारक के लिए प्रभार्य कीमत आधार दर का 60 प्रतिशत और प्रथम तल के कब्जाधारक के लिए आधार दर का 40 प्रतिशत होगी। जहां तीन मंजिल हैं और इसे एक से अधिक कब्जेदारों को हस्तांतरित किया जाना है, तो भूतल के कब्जाधारक के लिए प्रभार्य कीमत आधार दर का 50 प्रतिशत, प्रथम तल के कब्जाधारक के लिए 30 प्रतिशत और द्वितीय तल के कब्जाधारक के लिए आधार दर का 20 प्रतिशत होगी।
निकायों की बहुमूल्य संपत्तियों के मिल सकेगा रास्ता
प्रदेश के शहरी निकायों की बहुमूल्य संपत्तियों के लिए अब रास्ता या सड़क मार्ग मिल सकेगा। मंत्रिमंडल ने ‘पॉलिसी फॉर ट्रांसफर ऑफ म्युनिसिपल लैंड बाई चार्जिंग कंसीडरेशन’ नामक नीति को स्वीकृति प्रदान की है। इससे निकाय अपनी संपत्तियों को रास्तों व सड़क मार्गों से जोड़कर बेच सकेंगे या उन पर कोई नई परियोजना भी ला सकते हैं। रास्ते या सड़क न होने पर यह संपत्तियां बेकार पड़ी थीं। निजी लोगों की भूमि रास्ते व सड़क में आने के कारण बड़ी अड़चन आ रही थी। निकाय अब निजी लोगों की जमीन को बाजार मूल्य पर खरीद कर रास्ते व सड़कें बनाएंगे। इस नीति के सिरे चढ़ने से निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।