पंजाब में करीब 2 लाख दलित छात्रों ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी क्योंकि पंजाब सरकार ने उनकी 2,000 करोड़ रुपये स्कॉलरशिप कॉलेजों को नहीं चुकाई। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने बुधवार को बताया कि इस बारे में राज्य सरकार को 7 दिन में जवाब देने के लिए कहा गया है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला ने कहा कि आयोग ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि केंद्र द्वारा बकाया भुगतान के बावजूद कॉलेजों को पैसे का भुगतान क्यों नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि हमने मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। अनुसूचित जाति के छात्रों की कई शिकायतें हैं कि उन्हें कॉलेजों में अनुमति नहीं दी जा रही है क्योंकि सरकार ने उनकी फीस का भुगतान नहीं किया है। उन्होंने कहा कि 2017 में योजना से लाभान्वित होने वाले लगभग तीन लाख एससी छात्र थे और 2020 में यह संख्या घटकर 1-1.25 लाख हो गई। जब हमने राज्य सरकार से पूछा, तो उन्होंने कहा कि ये बच्चे पढ़ाई छोड़ चुके हैं।
‘केंद्र पर कोई बकाया नहीं’
विजय सांपला के मुताबिक बैठक में अधिकारियों ने बताया कि केंद्र की ओर से राज्य को छात्रवृत्ति का बकाया भुगतान नहीं किया गया है। इसके बाद केंद्र की ओर से जारी आंकड़ों में कोई बकाया नहीं होने की बात सामने आई, जबकि राज्य सरकार ने कॉलेजों को 2000 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया। अब यह सवाल उठता है कि छात्रवृत्ति का पैसा कहां गया।
मुझे पिछली सरकार के दौरान छात्रवृत्ति राशि जारी करने से संबंधित फाइलें मिली हैं। निजी संस्थानों को फंड जारी करने में अनियमितता पाई गई हैं। इस मामले में जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। एक-एक पैसे का हिसाब लिया जाएगा। - भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब