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हाईकोर्ट की फटकार के बाद जागा प्रशासन

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घायल वन्य जीवों की मदद को हमेशा होल्ड पर होगी रेस्क्यू टीम
हाईकोर्ट की फटकार के बाद यूटी प्रशासन ने घायल वन्य जीवों को तुरंत मदद की बताई योजना
हाईड्रोलिक लिफ्ट के माध्यम ले जाया जाएगा इलाज के लिए
-ट्रैंकुलाइजर का इस्तेमाल करने के लिए कर्मचारियों को किया जा रहा है ट्रेंड
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एक्सीडेंट में घायल सांभर की मदद के लिए आए वन्य कर्मियों द्वारा उसका इलाज करने के स्थान पर जाल डालकर क्रूर तरीके से घसीटने के मामले में हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रशासन की नींद टूट गई है और उसने तुरंत और सही सहायता उपलब्ध करवाने की योजना हाईकोर्ट में सौंपी है।
बीते दिनों पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के नजदीक सुबह सांभर का परिवार सड़क पर आ गया था। इस दौरान तेजी से आती कार ने परिवार के मुखिया को टक्कर मारकर बुरी तरह से घायल कर दिया था। सांभर को बचाने के लिए वन विभाग को वहां मौजूद लोगों ने फोन किया। वन विभाग का रवैया क्रूर रहा और उन्होंने जाल डालकर उसे काबू करने का प्रयास किया। कर्मियों के साथ कोई डाक्टर नहीं था जो सांभर को दर्द से निजात दिला सकता। क्रूर तरीके से सांभर को जाल में फंसाकर वाहन तक घसीटा गया। जस्टिस महेश ग्रोवर वहां मौजूद थे और इस क्रूरता को देखते हुए उन्होंने मामले का संज्ञान लेकर इसे जनहित याचिका के तौर पर सुनने का फैसला लिया और वन विभाग व ट्रैफिक पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
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मामला सुनवाई के लिए दोबारा पहुंचा तो वन विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं आया। हाईकोर्ट ने इस पर मुख्य वन संरक्षक को खुद हाजिर होकर जवाब देने के आदेश दिए। इसके बाद प्रशासन ने हलफनामा सौंपा, जिसे सिरे से खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह रंगीन पन्ने किसी काम के नहीं है। असल में जीवों को इस प्रकार तड़पना न पड़े इसे सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या किया गया है यह जानकारी दी जाए। कोर्ट ने कहा कि यदि इस प्रकार का बर्ताव किसी इंसान के साथ हो तो क्या वह सहन किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसा व्यवहार करने वालों को सबक सिखना जरूरी है।
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साइन बोर्ड लगाकर कर रहे जागरूक
इसके बाद वीरवार को मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो यूटी प्रशासन ने बताया कि रॉक गार्डन के सामने वाले रोड पर साइन बोर्ड लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही यहां पर गति सीमा निर्धारित कर दी गई है और हादसे की स्थिति से निपटने के लिए एक रेस्क्यू टीम को हमेशा होल्ड पर रखा जाएगा। घायल वन्य जीव को ट्रैंकुलाइजर का इस्तेमाल कर बेहोश कर सही तरीके से हाईड्रोलिक लिफ्ट का इस्तेमाल कर सुरक्षित स्थान पर ले जाकर इलाज किया जाएगा।
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