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321 करोड़ के घोटाले में 41वें आरोपी को भी अग्रिम जमानत
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आईओबी के तत्कालीन तीन असिस्टेंट मैनेजर, रिटायर्ड ब्रिगेडियर समेत 41 लोग हैं आरोपी
प्वाइंटर
लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिए बैंकों से की गई थी धोखाधड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 321 करोड़ के घोटाले के मामले में जिला अदालत से 41वें आरोपी को भी अग्रिम जमानत मिल गई है। आरोपी नई दिल्ली निवासी मोहित खन्ना है। उसे पांच लाख रुपये के बेल बांड पर अग्रिम जमानत प्रदान की गई है।
इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और बैंक ऑफ बड़ौदा में हुए 321 करोड़ रुपये के घोटाले के इस मामले में अन्य 40 आरोपियों को पहले ही जिला अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। बचाव पक्ष के वकील सिद्धार्थ पंडित ने बताया कि मोहित को केस में फंसाया गया है। बताया कि सीबीआई की दर्ज एफआईआर में मोहित नामजद नहीं है। ईडी ने मोहित को जांच में शामिल होने को समन भेजा था। कहा कि मोहित ने अपने बयान दर्ज कराए और वह जांच में शामिल होने को तैयार है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 41 आरोपियों पर मनी लाउंड्रिंग की धारा के तहत केस दर्ज किया है, जो कोर्ट में विचाराधीन है। आरोपियों में आईओबी के तत्कालीन तीन असिस्टेंट बैंक मैनेजर, रिटायर्ड ब्रिगेडियर, प्रोपराइटर्स और चंडीगढ़ की तीन निजी कंपनियों के दो डायरेक्टर समेत कुल 41 लोग हैं।
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दायर केस के अनुसार, आईओबी बैंक की चंडीगढ़ स्थित शाखा के तत्कालीन तीन असिस्टेंट बैंक मैनेजर आशु मेहरा, गौरव भाटिया और नीतेश नेगी ने वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बगैर हांगकांग बेस्ड कंपनियों को पीएनबी की दुबई शाखा और बैंक ऑफ बड़ौदा की बहामास शाखा को लेटर ऑफ क्रेडिट जारी कर दिए, जिस आधार पर बैंकों ने उन कंपनियों को करोड़ों की पेमेंट जारी कर दी। इससे पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा और आईओबी से कुल 321 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
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मुख्य तीन आरोपियों ने चंडीगढ़ बेस्ड दो कंपनियों के डायरेक्टर दिनेश कुमार, अमनप्रीत सिंह सोढी, अमन किरपाल, गौरव किरपाल, ब्रिगेडियर एमएस दुल्लत को करोड़ों का फायदा पहुंचाया। सीबीआई ने 8 अगस्त 2016 को मामले में आईपीसी-120/बी व 420 सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (2) आर/डब्ल्यू 13(1) (डी) के तहत केस दर्ज किया था। आरोप हैं कि चंडीगढ़ स्थित आईओबी शाखा के फॉरेक्स विभाग में वर्ष 2010 से तैनात आशु मेहरा सहित नीतेश नेगी और गौरव भाटिया ने दिनेश कुमार, अमनप्रीत सिंह सोढी, अमन किरपाल, गौरव किरपाल की कंपनियों को फायदा पहुंचाया। इससे पीएनबी, बॉब ओर आईओबी को 47.86 मिलियन यूएस डॉलर (करीब 321 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ। हांगकांग बेस्ड कंपनी मेसर्स कलर वेव लि. को सबसे अधिक लाभ पहुंचाने की बात सामने आई। ब्रिगेडियर (रिटा.) एमएस दुल्लत मुख्यारोपी आशु मेहरा का ससुर है और एग्रोटेक लिमिटेड का डायरेक्टर भी है। दूसरा डायरेक्टर अमनप्रीत सिंह सोढी है। ईडी को जांच में पता लगा था कि आरोपियों ने फर्जी बिल पर पेमेंट भी करवाई थी। विदेश में मौजूद पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा ने वहां स्थित कंपनियों को करोड़ों रुपये की पेमेंट जारी की। मामले का खुलासा तब हुआ जब, बैंक की शाखाओं ने पेमेंट की अदायगी को लिखा।
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