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जीएमएसएच 16 का आईसीयू फरवरी के अंत तक हो जाएगा चालू

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जीएमएसएच 16 का आईसीयू तैयार, फरवरी के अंत तक खुलेगा मरीजों के लिए
स्टाफ के लिए हरियाणा और पंजाब से डाक्टरों के डेपुटेशन पर आने का इंतजार
हाईकोर्ट ने डेपुटेशन मुद्दे पर हरियाणा व पंजाब से मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शहर में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए गवर्नमेंट मल्टी स्पेशियलिटी हास्पिटल (जीएमएसएच) -16 में आईसीयू बनाकर तैयार हो गया है। अब इसके लिए डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की ट्रेनिंग पूरी हो जाए तो इसे फरवरी के अंत तक आरंभ कर दिया जाएगा। इसके अलावा स्टाफ के लिए हरियाणा और पंजाब से डेपुटेशन पर डाक्टरों के आने का इंतजार किया जा रहा है। यूटी प्रशासन ने यह जानकारी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दी। हाईकोर्ट ने डेपुटेशन मुद्दे पर हरियाणा और पंजाब को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
प्रशासन ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया कि जीएमएसएच-16 का आईसीयू तैयार हो चूका है। फिलहाल एक स्तर नीचे हाई डेपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) के तौर पर शुरू किया गया है। आईसीयू के लिए डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा रही है। एक बार इनकी ट्रेनिंग पूरी हो जाएगी तो इसे पूरी तरह से आईसीयू के तौर पर फंक्शनल कर दिया जाएगा। यहां रेगुलर कैडर से चार एनेस्थेटिक को नियुक्त किया है, जिनमें से दो डॉक्टर्रों को जीएमसीएच-32 में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया है। ट्रेनिंग आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के दिशा-निर्देशों के तहत ही दी जा रही है। इसके अलावा यहां वेंटिलेटर्स के लिए आर्डर दे दिया गया है जो फरवरी के दूसरे सप्ताह तक मिल जाएंगे। फिलहाल कंपनी ने एक डेमो वेंटिलेटर भेजा है जिस पर कर्मियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ ही यह भी बताया गया कि ट्रेनिंग के बाद आईसीयू को ऑपरेट करना शुरू कर दिया जाएगा लेकिन कुल स्वीकृत पदों को पूरा भरने के लिए अभी समय लगेगा।
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इस जानकारी पर जस्टिस राजन गुप्ता ने कहा कि क्या यहां डॉक्टरों को पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर नियुक्त कर इन पदों को भरा जा सकता है। इस पर प्रशासन के सीनियर स्टैंडिंग काउंसल पंकज जैन ने कहा कि इसके लिए दोनों राज्यों को पत्र लिखा गया था लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। हाईकोर्ट ने अब इस मुद्दे पर अगली सुनवाई के दौरान दोनों राज्यों को पक्ष रखने के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा है कि अगर अगली सुनवाई तक दोनों राज्य जवाब नहीं देते हैं तो स्वास्थ्य सचिव को खुद पेश होकर इसका जवाब देना होगा।
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