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सड़क पर खराब खड़े टिप्पर से टकराई बोलेरो, दो युवकों की मौत

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रायपुररानी। रायपुररानी-नारायणगढ़ मुख्य मार्ग पर तहसील भवन के सामने रविवार देर रात ग्रेवर से भरे एक टिप्पर से बोलेरो कार के टकराने से हुए दर्दनाक हादसे में दो लोगों की मौत हो गई। जबकि कार में सवार एक अन्य व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे इलाज के लिए पीजीआई में भर्ती करवाया गया। पुलिस ने मृतक युवकों के शवों को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया गया है। जिनका शव सोमवार को होने वाले पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा। रात 11 बजे हुए इस दर्दनाक हादसे में मरने वाले युवकों की पहचान प्रदीप कुमार (35) व मेजर सिंह (36) हाल निवासी चंडीगढ़ के हल्लोमाजरा के रूप में हुई है। घायल युवक की पहचान सुभाष के रूप में हुई है। कार सवार तीनों लोग नारायणगढ़ से अपने घर चंडीगढ़ की ओर जा रहे थे। दोनों मृतक मूलरूप से यूपी के रायबरेली के रहने वाले थे, जो चंडीगढ़ में अस्थाई तौर पर रह रहे थे। जबकि घायल युवक सुभाष यूपी के फैजाबाद का रहने वाला है।
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मिली जानकारी के अनुसार रविवार को तहसील परिसर के समक्ष मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे खराब होने की वजह से टिप्पर खड़ा था। जिसका कार चालक को पता नहीं लगा और कार सीधे टिप्पर से जा टकराई। हादसे के बाद राहगीरों ने घायलों को पुलिस की सहायता से रायपुररानी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जहां पर दो को मृत घोषित कर दिया गया। इस घटना में चालक टिप्पर को छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों वाहनों को कब्जे में लेकर आरोपी टिप्पर चालक की तलाश शुरू कर दी।

सीएम की सख्ती के बाद भी नही थम रहा माइनिंग का अवैध गोरखधंधा
रायपुररानी की सड़कों पर अवैध माइनिंग में संलिप्त डंपरों पर जिला प्रशासन की सख्ती का कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। खनन माफिया की मिलीभगत से अब दिन की बजाए रात के अंधेरे में माइनिंग के काम को बखूबी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से पंचकूला की कोट बिल्ला गांव के पास माइनिंग माफिया पर दिखाई गई सख्ती के बाद माइनिंग का अवैध गोरखधंधा नहीं रुक रहा है। इलाके में लगभग दर्जन भर मुख्य नदियों से अवैध खनन के काम में लगे अधिकतर टिप्परों पर नंबर प्लेट नहीं लगी हुई है। अगर किसी पर है तो उस पर नंबर नहीं है। ऐसे में अवैध गोरखधंधे में लगे लोगों की पहचान कर पाना संभव नहीं हो पाता। इससे अलग इस काम में लगे अधिकतर टिप्पर चालकों के पास इन्हें चलाने का न तो अनुभव है और न ही उनके पास हैवी लाइसेंस है। सैकड़ों टिप्पर रोजाना सड़कों पर छोटे वाहन चालकों के लिए मौत का कारण बनते है।
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