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ठेकेदार ने टेक्नीकल एडवाइजर से जांच वापस लेने की मांग उठाई

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ठेकेदार ने शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन को लिखा पत्र
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टेक्निकल एडवाइजर से जांच वापस लेने की मांग
एडवाइजर और शिकायतकर्ता पुराने जानकार, जांच होगी प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। शहर के चौकों का सौंदर्यीकरण करने और उसके बाद गड़बड़ी के आरोपों को झेल रहे ठेकेदार ने शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन को पत्र लिखकर शहर के चौकों के सौंदर्यीकरण की जांच टेक्निकल एडवाइजर से वापस लेकर किसी निष्पक्ष एजेंसी से करवाने की मांग की है। मंत्री को लिखे पत्र में ठेकेदार ने कहा है कि जांच टेक्निकल एडवाइजर विशाल सेठ को सौंपी गई है, जिसमें विशाल सेठ को शहर के आठ चौकों के सौंदर्यीकरण में खर्च हुई राशि एवं इस्तेमाल किए गए मैटीरियल की जांच करने के लिए कहा गया है। वह इस जांच के खिलाफ हैं। निगम द्वारा उन्हें ठेका 11 जुलाई 2018 को अलॉट किया गया था, जिसके बाद उन्होंने दिन रात मेहनत करके चौकों का सौंदर्यीकरण डीएनआइटी के हिसाब पूरा किया, लेकिन एक व्यक्ति जोकि इस मामले में शिकायतें कर रहा है वह निगम कार्यालय के बाहर आया और उन्हें अपनी गाड़ी में बिठाकर कहने लगा कि कोटेशन में 10 प्रतिशत और टेंडर में 5 प्रतिशत रिश्वत लेता है। क्योंकि उन्हें पता है कि कैसे काम होता है और निगम के कुछ कर्मचारी उसे पूरी रिपोर्ट देते हैं। जिनके चलते जो भी ठेकेदार निगम में काम लेने आता है वह अपनी पेमेंट आसानी से ले सकें। वह चुपचाप कमीशन पहुंचा देते हैं।

व्हाट्सएप पर करता रहा चेटिंग
जब उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा कि आप निगम में कार्यरत हो या किसी अन्य विभाग में तो उसने बताया कि उसका काम निगम में अलॉट होने वाले कामों पर नजर रखना है। वह अच्छी तरह जानता है कि कौन कैसे पैसे देगा। यह बात सुनकर वह हैरान रह गए। उन्होंने उस व्यक्ति को उस समय यह कहकर टाल दिया कि कुछ दिन बाद मिलता हूं। इसके बाद उसने व्हाटसएप पर बातचीत की। व्हाटसएप कॉल की स्क्रीन शॉटस भी उनके पास है। वह उसे टालमटोल करता रहे।
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रिश्वत न मिलने पर की झूठी शिकायत
जब शिकायतकर्ता को लगा कि रिश्वत नहीं देंगे तो दिसंबर महीने में एक झूठी शिकायत उनके खिलाफ कर दी। यह व्यक्ति हमेशा से ही मीडिया को गुमराह करके उनसे झूठी खबरें लगवाता है। इसका काम ही यह है कि पहले ठेकेदारों को डराए, यदि ठेकेदार पैसे दे दे तो चुप कर जाता है। यदि पैसे ना मिले तो व्हाटसएप कॉल करके चेतावनी देता है और इसके बाद जब इसे पता लग जाए कि पैसा नहीं मिलने वाला तो शिकायत कर देता है। यदि वह भी बाकी ठेकेदारों की तरह इसे पैसे दे देता तो शिकायत नही करता है और पेमेंट भी हो जाती।
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ठेकेदार का आरोप, टेक्निकल एडवाइजर पुराने जानकार
ठेकेदार संदीप शर्मा ने आरोप लगाया है कि शिकायतकर्ता और टेक्निकल एडवाइजर पुराने जानकार हैं। करीब पांच साल में दोनों कई मौकों पर एक साथ दिखे हैं। यह कांग्रेसी ठेकेदारों से पैसा ठगने और यदि पैसे न मिले तो उनकी शिकायतें करने का आदी हो चुका है। पूरे दावे से कह सकते हैं कि टेक्निकल एडवाइजर और शिकायतकर्ता के बीच फोन पर आपसी बातचीत होती है। चाहे तो इनकी फोन कॉल डिटेल निकालवा कर चैक कर ली जाए। उन्हें विश्वास है कि यह शिकायतकर्ता टेक्निकल एडवाइजर को भी यही जोर लगाएगा कि वह ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट तैयार करें। इसलिए टेक्निकल एडवाइजर द्वारा बनाई जा रही रिपोर्ट पर संदेह है। मंत्री से गुहार लगाई है कि यह जांच निष्पक्ष एजेंसी को सौंपी दी जाए। ठेकेदार ने शिकायत की प्रति प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट, मुख्यमंत्री हरियाणा, चीफ सेक्रेटरी सहित अन्य को भी भेजी है।
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