मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का बचा हुआ खाना खाने से हुई पशुओं की मौत: ग्रामीण
- 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल व बाबा रामदेव मोरनी में हरड़ वाटिका के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे
- किसान के तीन पशुओं की मौत के बाद प्रशासन से की मुआवजे की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
मोरनी। बैहलों गांव में पिछले दो दिनों में एक ही किसान के तीन पालतू पशुओं की मौत जूठन खाने से हो गई। गाय, भैंस, बछड़ा आदि पशुओं की हुई मौत का कारण पशु चिकित्सकों के अनुसार सड़ा हुआ खाना खाने से फूड पायजनिंग होना बताया जा रहा है। वहीं पालतू पशुओं की अचानक हो रही मौत को लेकर आसपास के ग्रामीणों में भय का माहौल है।
किसान को आर्थिक मदद मुहैया करवाएं
बैहलों गांव के रहने वाले ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल व बाबा रामदेव मोरनी में हरड़ वाटिका के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान कार्यक्रम में आए लोगों के लिए बना खाना काफी मात्रा में बच गया था जिसे उचित जगह पर गिराने की बजाए आयोजनकर्ताओं ने लापरवाही बरतते हुए गांव के मुहाने पर गिरा दिया। जिसको खाने से पशुओं की मौत हुई है। राजेंद्र परमार, मदन सिंह, भूप्पी आदि ग्रामीणों ने बताया कि जिस किसान बलदेव सिंह के पशुओं की मौत हुई है वह काफी गरीब है उसके लिए इस आर्थिक नुकसान की भरपाई कर पाना संभव नहीं है इसलिए प्रशासन सरकारी काम में कोताही बरतने वाले लोगों को दंडित कर गरीब किसान बलदेव सिंह को फौरी तौर पर आर्थिक मदद मुहैया करवानी चाहिए। वहीं ग्रामीणों ने कहा कि अगर उनकी समस्या पर कोई उचित सुनवाई नहीं होती तो वह कार्यक्रम का आयोजन करने वाले लोगों के खिलाफ सीएम विंडों पर शिक ायत कर कार्रवाई की मांग करेंगे।
पशुओं के मालिक बलदेव सिंह की जुबानी
किसान ने बताया कि वह अपने पशुओं को पानी पिलाने के लिए गांव के पास बनी जोहड़ी के पास ले गया जहां बैहलों गांव में हुए सीएम व बाबा रामदेव के कार्यक्रम का बचा हुआ खाना कार्यक्रम आयोजकों ने डाला हुआ था। पशुओं ने खराब हुआ खाना खा लिया जिसके कुछ देर बाद गाय की तबीयत बिगड़ने लगी। बलदेव ने वेटरनरी डॉक्टर को दिखाया तो उसने बताया कि पशुओं को फूड पायजनिंग हो गया था। उसके बाद पशु तड़प-तड़पकर मरने लगे। पशुओं की हालत को लेकर जब पशु चिकित्सक मंजू से बात की गई तो उनका कहना था कि उनको बैहलों गांव से सूचना मिली थी कि पशुओं की तबियत खराब है तो उन्होंने मौके पर जाकर देखा तो पाया कि पशुओं को अफारा की समस्या थी। प्रथम दृष्टि से ओवर फिडिंग की समस्या लग रही थी। वहीं, वन विभाग के मोरनी रेंज प्रभारी सुनील शर्मा का साफ तौर पर कहना था कि कार्यक्रम में जो भी खाना बचा था वह उन्होंने गांवों में बंटवा दिया था। बैहलो गांव के बाहर किसने खाना गिराया उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।